सुनाते रहे
खामियां, खामियां तुम गिनाते रहे। बेवजह ही हमें, तुम सुनाते रहे।। हो हमारी ख़ता, या तुम्हारी ख़ता। हर दफा ही तुम्हें, हम मनाते रहे।। माना आवाज में मेरी जादू नहीं। गीत तेरे लिए फिर भी गाते रहे।। अंधा कानून है, सुनते हम आ रहे। न्याय अंधों से हम क्यों कराते रहे। अपने महबूब को चाँद…
