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बस कीजिये ! देशव्यापी व्यवस्था चलने दीजिये, धरनो से धारणा नहीं बदलेगी…!

सवर्णों से दूर हुई पार्टियों का ही अस्तित्व खत्म हुआ है
देश का पॉलिटिकल लोकतंत्र दो संविधान चलवा रहा,
एससी/एसटी एक्ट और यूजीसी रेगुलेशन देश विरोधी.!

पहले गरीबों को उनका हक़ दीजिये तब जाति और आरक्षण की बात कीजिए

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

बड़ी ही विकराल स्थिति है एक सवाल का कुछ और जवाब और उसी लेवल के दूसरे सवाल का कुछ और जवाब ! मैंने बीएचयू में नेहा बोरा से पूछा शर्जिल इमाम और उमर खालिद दोषी है की नहीं ! नेहा बोरा भक्क्क से बोल पड़ती है कोर्ट को डिसाइड करने दीजिये, आपके कहने से कैसे दोषी ! ठीक बात फिर मेरे एक दोस्त ने उनसे दिल्ली में पूछा कि ज्ञानेश कुमार दोषी है कि नहीं फिर नेहा भक्क्क से बोल पड़ी, हाँ है , मेरे मित्र ने माईक सहलाते हुए तत्काल प्रतिक्रिया दी क़ि क्यों अब कोर्ट का इंतजार नहीं कीजियेगा क्या ! मतलब अल्पसंख्यक उमर खालिद के लिए कोई संविधान और सवर्ण ज्ञानेश के लिए कोई और संविधान ! बस यही दोहरा मापदंड ख़त्म करने के लिए देश में और ज्ञानेश कुमार जरुरी है। रही बात कांग्रेस की तो मुझे समझ न आता कि राहुल गाँधी सच में पप्पू है कि कांग्रेस इसे आगे करके देश का मनोरंजन कर रही है। उसके सवर्ण समर्थक या तो मुर्ख हैं या उन्हें कांग्रेस ने कोई अफीम चटाई है क्यूंकि अब कांग्रेस वो नेहरू वाली कांग्रेस है ही नहीं ये तो लेफ्ट की राइट हैंड है मतलब फिरोज गाँधी के खान वाली कांग्रेस है जिसे हिंदुत्व का क़त्ले आम देखना है, सवर्णों का शोषण देखना है और आरक्षण का विष पूरे भारत में फैला कर भारत को नेपाल और बांग्लादेश बनते देखना है। दूसरी ओर धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब कॉकरोच पार्टी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की माँग को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रही है तो कॉकरोच तो खुद ही कानूनी लफड़े को न्योता दे रही जो बाद में तीनों कॉकरोच नेताओं को देश का गद्दार साबित कर देगा क्यूंकि कई दावों के अनुसार इनकी फंडिंग का डिप इकोसिस्टम और कनेक्शन विदेशी एंटीइंडिया संस्थाओं से है। जिसकी जाँच होनी बाकि है। कुछ दावो के अनुसार यह भाजपा की सी टीम है और ऐसा लगता है कि कॉकरोच पार्टी प्यादों की बलि लेकर राजा को बचाने आई है। अब आप सोचिये क्या ज्ञानेश कुमार ने यह अकेले किया ? और किया तो किसके लिए किया ? उनकी मोदी शाह से निकटता जग जाहिर है। मगर जब भी सरकार की ओर से कोई बड़ा घोटाला होता है कॉकरोच पार्टी प्यादे के इस्तीफ़े की माँग को लेकर जनता के ग़ुस्से को राजा के फेवर में मैनेज करती नज़र आती है, भाई दम है तो राजा का इस्तीफा मांग के अपनी पीठ चेक कर लो। ज्ञानेश कुमार ने अगर मनमानी की है, अगर वे चुनावी घोटालों के आरोपी हैं, तो वे अकेले क्यों इस्तीफ़ा दें ? उनके कार्यकाल के दौरान बनी हर राज्य सरकार को इस्तीफ़ा देना चाहिये, क्योंकि उन सरकारों की में सभी का सिलेक्शन उतना ही संदिग्ध है जितना ज्ञानेश कुमार जी का कार्यकाल। केरल, तमिलनाडु, बिहार और बंगाल की सरकारें तो बनी ही एसआईआर के बाद हैं। तब इस्तीफ़ा महज ज्ञानेश कुमार का क्यों हो ?
केरल और तमिलनाडु की सरकारों का क्यों नहीं ? मेरे पास अब लगभग देश के सभी लोकसभा चुनाव और प्रत्येक लोकसभा का डाटा है। जो ऐसे बेबुनियाद आरोपों को समझने में मदद करता है जिसमें वोट चोरी जैसे आरोप लगा कर अपनी कमी छुपाई जा रही।
हालात ये है कि असली दोषी ज्ञानेश कुमार नहीं कांग्रेस खुद है और देश की 51% लोकसभा सीट पर ये पार्टी अपना अस्तित्व खो चुकी है। जीतना तो छोड़िये उन सीटों पर इनके कैंडिडेट और भाजपा के प्रतिद्वंदी भी नहीं बचे है। अब जो पार्टी चुनाव लड़ते समय ही बहुमत पाने की उम्मीद खो चुकी होती है वो जब वोट चोरी टाइप बकवास करे तो मजाक ही होगा वो । सुनिए साहब ! ये राहुल गाँधी 328 सीट लड़े, 99 जीते इसमें से अगर में सहयोगियों की मेहरबानी निकाल दूँ तो कुल जमा इनके पास बस 80 के नीचे सीट्स है । संभावना यही है
और इनका जो सीधे प्रतिद्वंदी का प्रतिशत है वो 40% के नीचे हुआ। अब खुद का वजूद 60% सीट पर न रखने वाली पार्टी किस मुंह से ये इवीएम, चुनाव आयोग फलाना ढिमका पर आरोप का राग अलाप रही है ! अरे कांग्रेस के मूर्खो पहले तुम कम से कम देश की 60-80% सीट पर अपने खुद के सिंबल तो खड़ी करो… खुद को भाजपा का प्रतिद्वंदी बनाओ फिर तो तुमको किसी सत्ता विरोधी लहर का लाभ होगा या सीट चूरन की तरह बाँट दोगे, खड़गे के मुंह में मुंह डाल सवर्णो को गालियां बकोगे और राग अलापोगे वोट चोरी का। 15 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में तुमने 0 सीट हासिल किया क्यूंकि तुम्हारा सवर्ण कैडर ख़त्म है । पांच में तुमको सिंगल सीट मिली क्यूंकि पार्टी के पुराने कट्टर कांग्रेसी घर बैठ गए। कुल 20 में डब्बा गोल तुम्हारा। देश के 10 बड़े राज्यों में डियर यंग कम ओल्ड राहुल या तो तुमने अपना वजूद खो दिया या जो है भी तो सहयोगियों के भरोसे पर हो । उस पर भी दिक्क़त ये कि तुम सहयोगियों को भी डुबा देते हो अपने साथ। आगामी चुनाव उत्तर प्रदेश है। अगर यहाँ सपा हारी तो तय है कि तुम ज्ञानेश को इवीएम को मोदी को कोसोगे पर सपा के गुंडाराज, भ्रष्टाचार पर तुम्हारे मुंह से एक शब्द नहीं निकलेगा। तय तो यह भी है कि उसके बाद 2029 चुनाव में कांग्रेस से बड़े सहयोगी राम राम कर लेंगे या फिर ख़ुदा हाफ़िज़ बोल कल्टी मार लेंगे क्यूंकि फर्जी छात्र मंच तक लें जाने में कोई बुराई नहीं पर उनसे उन्ही कि पोल खुलवाना सबसे बड़ा गधापंथी है और जिस नेहा सिंह राठौर से पूरा देश चिढ़ता है उसके साथ मंच शेयर कर राहुल बाबा आपने अपना पैर हसुआ पर दे मारा है। एक टांग कन्हैया कुमार ने काटा था कांग्रेस का अब दूसरा ये नेहा राठौर काट लेगी ।कब तक कोई गधे पर घुड़दौड़ में दाव लगाएगा और उस हालात में कांग्रेस 2029 में 50 सीट भी न जीत पायेगी भले भाजपा का नाराज़ वोट मिले तब भी काहे कि वोट देने को सवर्ण हितैषी कांग्रेस चाहिए तो होगी ही। तो कुल जमा पप्पू भईया ये ननिहाल में ज्ञानेश वाला रोना बंद करो और पहले अपनी पार्टी का वजूद बचाओ उसे बढ़ाओ.! शायद तुम 2034 चुनाव में सामने खड़े होने लायक हो जाओ ! और जिन खड़गे टाईप के लोगो को लगता है कि राहुल गांधी कल से सड़क पर उतरे आमरण अनशन कर, चुनाव का बहिष्कार करें, बड़ा आंदोलन जल्दी करके और फटाफट प्रधानमंत्री बन जायेंगे उनकी छुट्टी कर दीजिये पार्टी से और पार्टी में सर्व समाज के अच्छे लोगो को बिठाइये जो सबके लिए क़ाम करें बिना अनर्गल बकवास और शोषण का फर्जी रोना रोये बिन ! और अपने पाठकों को कहना चाहूंगा कि शायद आप राहुल गांधी की राजनीति को समझ ही नहीं पाए। राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने के लिए ये सब नहीं कर रहे। वे चुनाव जीतने के लिए भी वो सब नहीं करते, जो आप उनसे करवाना चाहते हैं। कब क्या करना है, वो जानते हैं। आप तय मत कीजिए। आप अपने हिसाब से उनसे सब कुछ करवाना चाहते हैं, तो यह आपकी समस्या है, राहुल गांधी की नहीं। नोटबंदी, तालाबंदी और गब्बर सिंह टैक्स पर बोलना जरूरी लगा, तो बोले पर आपने आरक्षण रिफार्म पर उन्हें चुप करा दिया तो कहाँ से मिलेगा वोट ! राफेल की कथित दलाली पर बोलना जरूरी लगा, तो बोले—आपका इंतजार नहीं किया। पेपर लीक पर छात्रों की आवाज उठानी जरूरी लगी, तो देशभर में छात्रों की गूंज कर रहे हैं पर सवर्ण गरीब छात्रों और बुर्का प्रथा पर आपने चुप करा दिया ! और आज से एक साल बाद जब उन्हें वोट चोरी और पूरे भारत में संघ, साहब और ज्ञानेश की पोल खोलना ज्यादा जरूरी लगा, तो वो भी कर रहें पर इसका मंथन नहीं कि आज सलमान खुर्शीद कहाँ है, प्रमोद तिवारी कहाँ है, जितिन प्रसाद कहाँ है, आचार्य प्रमोद कृष्णन कहाँ है, गौरव बल्लभ कहाँ है, रिता बहुगुणा जोशी कहाँ है ! और आपके साथ क्यों नहीं है ! क्यों ब्राह्मण समाज आपसे कट गया.? आत्ममंथन कीजियेगा। इंदिरा गाँधी के बाद कांग्रेस ने हर बार अपना रास्ता चुना वोटर के इंतजार में नहीं बैठे। हो सकता है आपकी नजर में वे आज सफल हो रहे हों, लेकिन वे पूरी ताकत से 20 साल से कोशिश कर रहे हैं—खुलकर और लगातार पर असफल है क्यूकि कांग्रेस अब नफरत कि राजनीति कर रही। भाजपा धर्म में नफरत कि राजनीति करके आई आप जाति में नफरत फैला कर आना चाह रहें। भाजपा वाले सफलता या असफलता का हिसाब लगाकर काम नहीं करते। यही कारण है कि उनके लिए मौजूदा सरकार को हटाना अंतिम लक्ष्य सरल नहीं है। आज आपको भाजपा को सत्ता से हटाने की जल्दी है—तो यह भी आपकी समस्या है। क्योंकि राहुल गांधी सिर्फ बीजेपी को हटाने की बात नहीं कर रहे। वे पूरे सवर्ण सिस्टम को तबाह करने कि लड़ाई की लड़ रहे हैं जिसका कोई अर्थ नहीं और सवर्ण भारत कि आत्मा है और ये लड़ाई सिर्फ मोदी को हटाने पर खत्म नहीं होगी।आप चाहते हैं कि वे जल्दी प्रधानमंत्री बन जाएं तो आपको सवर्ण के सामने नतमस्तक होना ही होगा। यह आपकी जरूरत हो सकती है, उनकी नहीं। और अगर आपको सच में लगता है कि देश को बदलाव चाहिए, तो एक सवाल खुद से भी पूछिए—सारा कानून सवर्ण विरोधी क्यों है, बलि का बकरा राहुल गांधी ही क्यों ? अगर आपको राहुल से ही उम्मीद है, तो कुछ उम्मीद अपने आप से भी रखिए।
इधर नवगठित काक्रोच जनता पार्टी ने भी ज्ञानेश को मात्र 48 घंटे का समय देकर इस्तीफा मांगा है। कौन है ये समय देने वाले और अनाप – शनाप बकने कि छूट इन्हे क्यों मिली है। संविधान यदि नहीं होता तो उसके बाद वे एक बार फिर बांग्लादेशी एजेंटो के साथ पुराने अंदाज़ में जंतर-मंतर में प्रकट होंते पर इसबार सेफ जोन मुंबई चुना है क्यूंकि वहां दलित वर्ग आरक्षण बचाओ नाम से इकट्ठा होगा अलर्ट रहिये । चूंकि प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी भी इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं। समूचा विपक्ष उनके साथ है। पिछले चुनावों से बिहार, बंगाल खौला हुआ है। जंतर-मंतर वाले भी शामिल होंगे यानि मजमा इस बार बहुत बड़ा होगा पर अबकी एक्शन भी बड़ा होगा । भाजपा ने तो बाकायदा ऐलान कर दिया है अब सीधा रासुका लगा कॉकरोच नेताओं को लटकाएंगे। अच्छा हो,यह आंदोलन सिर्फ ज्ञानेश के इस्तीफे तक ही ना हो बल्कि मोदी के इस्तीफे पर हो। चुनावों में हुई धांधलियों के मद्देनजर पुनः चुनाव की मांग पर केरल और तमिलनाडु भी फसेगा । पिछले चुनावों की कथित गड़बड़ियों को भी ध्यान में रखते हुए जबरिया जीतधारियों के विरुद्ध मुहिम प्रारंभ होगा तो लाठिया बरसेगी तथा उन कॉकरोचो से जंतर मंतर पर हंगामे के दौरान जनता की ख़र्च हुई धनराशि की वसूली भी होनी चाहिए। इसके साथ उनको अब तक प्राप्त राशि का ब्यौरा भी वसूला जाए। दोबारा धरना आयोजित करने से पहले सौबार सोचें क्यूंकि सारा खर्च उनसे ही वसूलने का पुख्ता इंतजाम हो।

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