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बाल बहार, (कविता) दिवाली की छुट्टियां

दीपावली त्यौहार का,अनुपम अपना ढंग।  बच्चे मनाते हैं खुशी से, घरवालों के संग॥  घरवालों के संग, मजा तब दुगुना हो जाता।  होते जब मित्रों संग, फुलझड़ी स्वयं चलाता॥  रहा इंतजार महीनों से, अवसर कब आयेगा।  दिया रावण दहन संदेश, मास अगले आयेगा॥  हम दिन गिन रहे थे रोज,माह कार्तिक का आया।  तब अमावस्या से पूर्व,…

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सम्पादकीय : अहम को त्यागकर ही एकता संभव है

            31 अक्टूबर सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है । महान स्वतंत्रता  सेनानी भारत के पहले उप–प्रधानमंत्री एवं पहले गृहमंत्री सरदार पटेल जी की अनेक अन्य विशेषताओं में से जो सबसे प्रमुख रही कि उन्होंने भारतीय रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने में अहम…

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पति – पत्नी

 सुधांशु बहुत खुश था , बिज़नेस में फायदा हुआ था , और अपनी शादी की तीसवीं वर्षगांठ पर, पत्नी आभा को बढ़िया सा उपहार देना चाहता था, उसने ऑफिस से फ़ोन किया , “ सुनो आज शाम को खाना बाहर खाएंगे। ” “ क्यों ? “ “ क्यों क्या , बहुत दिन हो गए हैं…

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व्यंग्य – जब  रावण ने लंका में कराई जाति जनगणना..!

रावण खुद को आठवीं पास त्रिलोक विजेता कहता था, और अचानक उसे जरुरी काम से किस्किंधा निकलना पड़ा तो रास्ते में उसे युवराज ने बताया की तुम्हे कुछ दिनों के लिए वहां का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया जा रहा। रावण चौक गया और पूछा युवराज मै दशानन किंग हूँ फिर ये नाइंसाफी क्यों तो युवराज ने…

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  क्रिकेटमय हो चुका है भारत

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव भारत में चुनाव और क्र्रिकेट का बुखार चढा है । बहुप्रतीक्षित विश्वकप क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन भारत में हो रहा है । वैसे भी भारत में क्र्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है ही तो जब विश्वकप हो रहा हो तो फिर आम आदमी को तो इस खेल से जुड़ना ही है सो जुड़ चुका…

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मत बहाओ खून

मत  बहाओ  खून  मनुता का,    अये सभ्य  मानवो! रो- रोकर  है  पूछती  तुमसे   मनुजता      आज  है। तुम  थे  बहुविकसित, बुद्धि – विवेकयुक्त भलेमानस कहां  पायी  ऐसी  पशुता,    कैसा   यह  समाज   है? धांय-धांय, सांय-सांय  करते  गिर  रहे  बारूद- गोले टूट- टूटकर  के  ढह  रही  हैं    बहुमंजिली   इमारतें बन गए  वीरान   शहर  जो   कलतक   थे   आबाद नहीं…

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नारी के अखण्ड सौभाग्य व अदम्य सहनशक्ति का परिचायक :करवाचौथ

व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाऽऽप्नोति दक्षिणाम् ।दक्षिणा श्रद्धामाप्नोति श्रद्धया सत्यमाप्यते।। अर्थात् व्रत धारण करनेसे मनुष्य दीक्षित होता है, दीक्षासे उसे दाक्षिण्य (दक्षता, निपुनता) प्राप्त होता है, दक्षताकी प्राप्तिसे श्रद्धाका भाव जाग्रत होता है और श्रद्धासे ही सत्यस्वरूप ब्रह्मकी प्राप्ति होती है । (यजुर्वेद १९ । ३०)। भारतीय संस्कृतिका यही लक्ष्य है कि, जीवनका प्रत्येक क्षण व्रत, पर्व…

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दिल्ली शिक्षा विभाग जेईई व नीट की तैयारी के लिए एक लाख छात्रों को मुफ्त मॉक टेस्ट प्रधान कराएगा

दिल्ली शिक्षा विभाग एक लाख छात्रों को सीयूईटी, जेईई और नीट के लिए मुफ्त मॉक टेस्ट प्रदान करने के लिए सहयोग कर रहा है। दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के छात्रों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस अग्रणी कदम में, विभाग ने एक लाख इच्छुक छात्रों को…

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कहानी : विश्वास

राजीव  करीब  काम में फस कर दो साल से घर नहीं आ पा रहा था । सारी सुविधाओं के बीच भी रेनू विरह  की वेदना झेल रही थी। उसके ऊपर राह चलते आने -जाने वाले लोगों का ताना मानो हर दिन एक नई ही कहानी सुनने को मिल जाती, लेकिन वह अपना दर्द कभी राजीव…

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गरीबो का ये कैसा जालिम कहर है ।

गरीबों से पूछो क्या होती गरीबी है। गरीबी की हालत उन्हीं को पता है। जिसे दर – दर की ठोकर खिलाती गरीबी गरीबी तो फांसी से बढ़कर सजा है । मालिक गरीबी को काहे रचा है। गरीबों के तन को देखाती गरीबी कितना बचा है वजन को देखाती गरीबी खाने को कोई चारा नहीं है।…

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