जीवन के वृक्ष को जीवन्त रखना है,
जीवन के वृक्ष को जीवन्त रखना है, प्रेम के पानी से उसे सींचते रहना है। उसको सुखाता है नकारात्मक सोच, शुभ सोच से सदा हराभरा रखना है। अहंकार की ऊष्मा विष के समान है, जो जीवन को विषाक्त कर देता है। जो सीख लिया है दंभ को दुत्कारना, मजेदार जीवन का वह मजा लेता है।…
