खुशी का गीत
गजेन्द्र अधाना जी = वन गए नाना जी। किस्मत ने खोल दिया देखो खजाना जी। खुशियों की मिली मिठास रे ओए बल्ले बल्ले। देखो पूरी हो गई आस रे ओए बल्ले बल्ले आप सब को मुबारक हो = स्वस्थ सुंदर बालक हो। बालक वो प्रति पालक हो = देश का अच्छा नायक हो…
गजेन्द्र अधाना जी = वन गए नाना जी। किस्मत ने खोल दिया देखो खजाना जी। खुशियों की मिली मिठास रे ओए बल्ले बल्ले। देखो पूरी हो गई आस रे ओए बल्ले बल्ले आप सब को मुबारक हो = स्वस्थ सुंदर बालक हो। बालक वो प्रति पालक हो = देश का अच्छा नायक हो…
1 क्या खोया ,क्या पाया अतीत के पन्नों को जब पलटा मैंने….तब देखा ,क्या खोया,क्या पाया….धोती-कुर्ता को छोड़,जींस-टाप क्या पहन लिया….चरण स्पर्श को छोड़,हाय-बाय को अपना लिया….दादी-नानी के रिश्तों को भुला दिया,व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर को अपना लिया…अतीत के…..अपने ही घर को मकान बना दिया,नयी दुनिया को अपना मुकाम बना लिया,समय को सपनों की दुनिया में…
1.कमल आसना शारदा, करो मेरा उद्धार। विद्वजनों में मान हो,लेखन में हो धार।। 2. विद्या दान महा दान , समझो रे नादान। किसी को शिक्षित न किया,तो कैसे विद्वान।। 3. विद्यावान बनें सभी,करें राष्ट्र निर्माण । बेटा बेटी सब पढ़ें,तब ही हो उत्थान।। 4. बेटी को पढ़ाने में क्यूँ आती है लाज । बेटा भविष्य…
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव हाय ! कितनी प्यारी कटु हंसी से हंसे वे । वे तो भूल भी गए कि वो एक राज्य के कृषि मंत्री हैं । नेता तो ऐसे ही भूल जाते हैं, उवे च्यवनप्रास खाते हुए भी भूलने की बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं । उत्तर प्रदेष के कृषि मंत्री…
हमारी भारतीय संस्कृति में सदैव ही नारी जाति का स्थान पूज्यनीय एवं वन्दनीय रहा है, नारी का रूप चाहे मां के रूप में हो, बहन के रुप में हो, बेटी के रुप में हो याफिर पत्नी के रूप में हो सभी रुपों में नारी का सम्मान किया जाता है। यह बात आदिकाल से ही हमारे पौराणिक गाथाओं में…
जा रहा है कोरोना लेकर कितनों की जान कितनों की बर्बादी ,कितनों का ईमान इतिहास गवाही देगा, उनकी तबाही की गूंजती है जिनके रोने की आवाज खुलने लगे हैं बाजार होने लगी है चहल पहल सुनाई देने लगी गानो की आवाज,पर गूंजती है उनके रोने की आवाज छिन गई है जिनके घरों में रोटियां बुझ…
एक सम्प्रदाय चौदह सौ वर्ष में अठावन देशों में दूसरा दो हजार वर्षो में पिचासी देशों में फेल हो गया लेकिन सत्य,अहिंसा,वसुधैव कुटुम्ब कम,सर्वधर्म समभाव,नारी तू नारायणी और सबका साथ सबका विकास की बात करने वाला सनातन जो असल धर्म है फैलने की बात तो दूर दुनिया नहीं तो कम से कम भारत के ही…
घर में कोई शादी हो या पूजन – पाठ, या कोई भी अन्य आयोजन, खर्च और रिश्तेदारों की फिकर से इतर इन आयोजनों का सबसे अधिक आनंद इस घर के बच्चे ही उठाते हैं। जिन्हें न खर्च की फिक्र होती है न ही रिश्तेदारों के नखरे झेलने की, वह तो अपनी ही मौज में मस्त…
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ जब भारत में कोरोना महामारी का पहला मरीज संक्रमित पाया गया तब हमने चैकसी बरतनी शुरू कर दी थी, ऐसा हमें बताया गया । धीरे धीरे संख्या 50 / 100 तक पहुँची तब तक हम ‘जनता कर्फ्यू’ तथा लॉकडाउन की प्रक्रिया प्रारंभ कर चुके थे । जब पहले लॉकडाउन की घोषणा की…
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सारे विष्व में उथल-पुथल मची हुई है । ‘‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’’ के सिद्धांत पर अब दुनिया चल रही है । इसमंे जिसके हाथ मं छड़ी तक नहीं है वह पिस रहा है । कोरोना की मार भूल कर अपनी लाठी को कच्चे तेल से चमका का कर वे उठ खड़े हुए…