एक गीत चलो गाए
एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए मुसर्रत हो जिसमें इतनी कि मन झुम जाए सिमट दे जो हर ग़मों को इक नगण्य बिंदु में दर्द हो चाहे जितना भी हर कोई भूल जाए एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए। मुरझाईं रुखसारों की हर कलियाँ खिल उठे मौन होंठों पे फिर से…
