चलो आज कुछ कह लेती हूं
मैं भी अपने अंतर्मन से कुछ बातें चुन लेती हूँ चलो आज कुछ कह लेती हूं। मैं वही हूं जिस मिट्टी ने नूतन आकार लिया है मैं वही हूं जिसके अपनों ने सहर्ष स्वीकार किया है मैं अपने अंतस की गर्मी को आज हवा देती हूं चलो आज कुछ कह लेती हूं। तोड़ने आए थे…
