मै नारी ही क्यों बनी ?
अपना जीवन देकर मैं, जीवन संगिनी तुम्हारी बनी हूँ अपना सब कुछ देकर तुम्हें, तुम्हारी अर्धांगिनी बनी हूँ तुम सभी को जैसे हो वैसे ही अपनाकर एक स्त्री बनी हूँ पुरे परिवार को भरपेट भोजन कराकर ही मै अन्नपूर्णा बनी हूँ मगर क्यों मुझे लगता है कि मेरा कोई अस्तित्व नहीं है मगर सच तो…
