छंद- गीतिका : यह समझ
मापनी- 2122 2122 2122 212 पदांत- यह समझ समांत- अहले साँस चलती है समय से तेज पहले यह समझ। चल सके तो वक़्त के ही संग बहले यह समझ। पंचतत्वों से बना अनमोल है यह तन मिला, ये बचें इनके लिए हर कष्ट सहले यह समझ। यह अगर हैं संतुलित तो मानले तू है सुखी,…
