गर्मी की कुण्डलियाँ
अजय कुमार पाण्डेय 1 दिन सारा जलता लगे, लगे सुलगती शाम रवि को कुछ इसके सिवा, और नहीं है काम और नहीं है काम, धूप में लगा तपाने बरसा के फिर आग, लगा औकात दिखाने न विद्युत है न नीर, जी रहे दिन गिन गिन सब प्राणी बेचैन, कठिन अब गर्मी के दिन। 2 जल…
