मनुष्य या ब्रह्माण्ड
जब वे सब अध्यात्म विशेषज्ञ,और इस विज्ञान युग कीविशिष्ट चिंतन प्रक्रिया के अति संवेदनशील विशेषज्ञ भी ब्ह्म के एकमात्र सत्य अस्तित्ववान होने को नकार नहीं सकते। यह मानना कि वह निराकारहै , जिसका एक व्यक्तिअथवा किसी एक जीव का स्वरूप नहीं,और यह कि सम्पूर्ण ब्ह्माण्ड उसकी इच्छा से हीउसके स्वरूप को ही स्वयम में धारता…
