कविता और कहानी
पति – पत्नी
सुधांशु बहुत खुश था , बिज़नेस में फायदा हुआ था , और अपनी शादी की तीसवीं वर्षगांठ पर, पत्नी आभा को बढ़िया सा उपहार देना चाहता था, उसने ऑफिस से फ़ोन किया , “ सुनो आज शाम को खाना बाहर खाएंगे। ” “ क्यों ? “ “ क्यों क्या , बहुत दिन हो गए हैं…
डॉ. मनोज कुमार “मन” की तीन कविताएँ
कवि तुम मुझे जगा देना अंसतोष बहुत था उसके मन में, सो, वो रो दिया। जमा हुई भीड़ में उसने, किसी अपने को खो दिया।। अब तो कोई भी बरगला लेता है, मासूमों को राम के नाम पर। देखो गौर से अब जमाने में, वश नहीं रहा किसी का काम पर।। देखो आज फिर आ…
कहानी : विश्वास
राजीव करीब काम में फस कर दो साल से घर नहीं आ पा रहा था । सारी सुविधाओं के बीच भी रेनू विरह की वेदना झेल रही थी। उसके ऊपर राह चलते आने -जाने वाले लोगों का ताना मानो हर दिन एक नई ही कहानी सुनने को मिल जाती, लेकिन वह अपना दर्द कभी राजीव…
नवजीवन खुशियों की ओर
प्रीति आठ महीने के गर्भ से थी। यह उसका तीसरा बच्चा था। पहले से ही उसकी दो बेटियाँ थी। जिन्हें वह खूब लाड प्यार करती थी। उसकी इच्छा नहीं थी कि वह और संतान पैदा करें। लेकिन सास की पोते का मुंँह देखने की लालसा से उसे यह करना पड़ा। प्रीति के पति आयुष भी…
गरीबो का ये कैसा जालिम कहर है ।
गरीबों से पूछो क्या होती गरीबी है। गरीबी की हालत उन्हीं को पता है। जिसे दर – दर की ठोकर खिलाती गरीबी गरीबी तो फांसी से बढ़कर सजा है । मालिक गरीबी को काहे रचा है। गरीबों के तन को देखाती गरीबी कितना बचा है वजन को देखाती गरीबी खाने को कोई चारा नहीं है।…
साबरमती के संत
अब तो रह-रह के राजघाट कसमसाने लगा, मुझको साबरमती के संत तू याद आने लगा। गूंथ कर हार भ्रष्टाचार के गुलाबों का, तेरी तस्वीरों पै बेखौफ डाला जाने लगा। तेरे चित्रों से छपे कागजों के टुकड़ों पर, बड़े बड़ों का भी ईमान बेचा जाने लगा। पहले कातिल बने फिर…
लघुकथा : मरहम
लेखिका : डोली शाह आज श्रेया म्यूजियम जाने के लिए बिल्कुल तैयार बैठी थी, लेकिन मेरे दफ्तर से आने में थोड़ी विलंबता के कारण जाना ना हो पाया । वह नाराज होकर आराम करने बिस्तर पर चली गई । कुछ ही समय पश्चात सुरेश पानी पीने फ्रिज तक पहुंचा, श्रेया ने फौरन बोतल लेते हुए…
आजादी का पर्व मनाते,भारतवासी शान से!
आजादी के महापर्व पर समर्पित देश भक्ति कविता:-1-आजादी का पर्व मनाते,भारतवासी शान से!अगस्त15 याद दिलाता, जीना है सम्मान से॥मुगल हटाये सत्ता से, तो अंग्रेजी शासन आया!इंकलाब हो जिंदाबाद, तब वीरों को नारा भाया॥किया सफाया उनका हमनें, अपना सीना तान के!आजादी का पर्व मनाते भारतवासी शान से॥2- आज तिरंगे से ही मेरी, दुनियाँ में पहिचान है!करते…
रक्षाबंधन पर्व महान
उमाकांत भारद्वाज (सविता) ‘लक्ष्य’ भूतपूर्व शाखा प्रबंधक एवं जिला समन्वयक-म.प्र. ग्रामीण बैंक, भिंड (म.प्र.) 1- रक्षाबंधन पर्व महान, श्रावण पूर्णिमा हिंद की शान!आबाल वृद्ध मिल सभी मनाते, करते बहिनों का सम्मान॥2- नन्ही बहिना इंतजार में, बांधू राखी भाई प्यार में!अमर रहे भाई दुनियाँ में, छोडे़ ना मंझधार में॥3- रखती व्रत बहिना पूरे दिन, आन बान…
