Latest Updates

“अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस “ की बहुत बहुत बधाई

हम महिलाओं को अपने वजूद का एहसास स्वयं ही करवाना होगा सभी महिलाओं को “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस “ की बहुत बहुत बधाई महिलाओं को समर्पित कुछ पंक्तियाँज़िम्मेदारी संग नारी भर रही है उड़ान ,ना कोई शिरकत ना कोई थकानमहिलाओं को दे इतना सम्मान ,जिससे बढ़े हमारे देश की शान ।महिलायें दो परिवारों की शान बान…

Read More

जरूरी है (गजल)

शंकाओं का शमन जरूरी है। आतंकों का दमन जरूरी है। आगे बढ़कर करें इसे संभव। दुनिया भर में अमन जरूरी है। श्रम से सींचें सभी इसे मिलकर। अपना सुरभित चमन जरूरी है। दुष्टों को तो सबक सिखाना है। पूज्यों के प्रति नमन जरूरी है। कलियुग ने तो किए बहुत करतब। सतयुग का आगमन जरूरी है।

Read More

राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वाधान में ऑनलाइन अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन आयोजित

पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कवि संगम हापुड पिलखुवा इकाई के तत्वावधान में एक अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांतीय मुख्य संयोजक वरिष्ठ कवि अशोक गोयल ने की। *कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि प्रांतीय प्रभारी शील वर्धन रहे व सानिध्य वरिष्ठ कवि एवं सहित्यकार प्रेम निर्मल का रहा।कार्यक्रम का…

Read More

बेटी दोहरा रही है

माँ अपनी आँखों से काजल उतार कर मेरे माथे पर टिका लगाती| मेरे होंठों पर लगे दूध को अपने आँचल से पोछती होठों से प्यार की चुम्बन देती माथे पर शुभ आशीष की तरह | फिर भी माँ के मन मे नजर ना लग जाए कहीं भय समय रहता | भले ही माँ भूखी हो…

Read More

पथ के हो राही

पथ के हो राही तुम हो पथिक थक के न हारो  थोड़ा  भी तनिक थोड़ा धीरज धर   बढ़ते जाना एक दूजे का   मनोबल बढ़ाना, आएंगी  बाधाएं हजार साहस को तुम   बनाना आधार, टेड़ी मेड़ी    होगी डगर चलते जाना    तुम हो निडर, आएगी जो भी     है रुकावट वो तो होगी   बस क्षणिक… पथ के हो राही…

Read More

गीत : सावन में,पीहर याद आए,गीत

सावन में,पीहर याद आए, बाबुल का, अंगना वो बुलाए। बीता बचपन, जिन चौवारों में, यादों का बादल, नैन भिगाए। भाई बहन संग,  खेल खेले, लड़ने मिलने  में, दिन बिताए। वो बारिश में,  भीगना छत पे, कागज़ की नौका, मिलके बहाए।  बाते अब वो, जाने कहा है,  मिलने के दिन, रैना न आए। छूटा पीहर, बंधी…

Read More

सूरज की सगी बहन

आग उगलती दोपहरी ये अंगारे सा दिन, कब आषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन। प्यासे अधर नदी झरनों के, कंठ कुओं के सूखे, दिन भर के दुबके नीड़ों में, पंछी सोऐं भूखे। प्रातः से ही तपन तपस्विन करने लगी हवन, कब मेघों का बिजुरियों से होगा मधुर मिलन। सड़कों पर सन्नाटा लेटा, मृग मरीचिका बनकर,…

Read More

“स्वर्ग का द्वार”

स्कूल कई महीनों से बंद थे। बच्चे घर में रह कर परेशान हो गए थे। यही कारण था कि घर में दिन भर कोहराम मचा रहता। दिन भर चीखना चिल्लाना, मारना पीटना, रोना धोना बस यही हो रहा था। गांव से दादाजी आए तो उन्हें यह सब देखकर बहुत दुख हुआ। उन्होंने बच्चों को बुलाकर…

Read More

जन-गण-मन अधिनायक….. : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा आइये हम अपनी स्वतंत्रता की एक और वर्षगांठ गर्वोन्मुख मस्तक के साथ मनाएं । हमारा राष्ट, हमारा ध्वज और हमारा राष्टगान हमारी धरोहर है और हर भारतीय इस पर गर्व करता है । ‘‘जनगण मन अधिनायक’’ की मधुर स्वरलहरियां हमारे तन और मन में जोश भर रहीं हैं । हम नतमस्तक हैं अपने…

Read More

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल देवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील समझ के लिए तैयार है? नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है।  पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं। बहुत जगह कन्याओं का शोषण होता…

Read More