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हरा भरा खेत

बारिश हुई झम झमाझम , मेढ़क टर्र टर्र टर्रा रहे हैं । झींगुर बजा रहे शहनाई , केंचुए मिट्टी ये खा रहे हैं ।। पहले जो पड़े हुए थे श्वेत , आज हुए हरे भरे ये खेत । कह रहा है हर्षित बादल , चल किसान अब तो चेत ।। पड़े जो अब तक विरान…

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सविता चड्ढा द्वारा लिखी पुस्तक”हिंदी पत्रकारिता भूमिका और समीक्षा” का लोकार्पण और उनकी कहानियों पर चर्चा संपन्न

“हिंदी पत्रकारिता भूमिका एवं समीक्षा’ का लोकार्पण पंजाब केसरी की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चोपड़ा,श्री अनिल जोशी, श्री ऋषि कुमार शर्मा ,डाॅ. मुक्ता, ओमप्रकाश प्रजापति एवं मनमोहन शर्मा ‘शरण’ जी के कर कमलों से संपन्न हुआ। लेखिका सविता चड्ढा ने उपस्थित सभी माननीय अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करते हुए कहा कि उनका लेखन अपने…

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रोटी से बड़ी हो गई गैस – शहर छोड़ते मजदूरों की मजबूरी

– महेन्द्र तिवारी भारत में प्रवासी मजदूरों का संकट एक बार फिर सामने खड़ा है, और इस बार इसकी जड़ में केवल आर्थिक मंदी या रोजगार की कमी नहीं, बल्कि एक गहरा ऊर्जा संकट है, जिसने शहरों की चमक के पीछे छिपी कमजोरियों को उजागर कर दिया है। हाल के दिनों में देश के कई…

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कैसे भूलूं तुझे ए मां

छुटपन में आता न था खाना न ही चलना और बैठना पैदा हुए तो एहसास न था जीने का आगाज न था तूने ही संभाला था तूने ही संवारा था बड़े होने की व्यथा बड़ी सज़ा  बड़ी कड़ी थी दुःख की तपती धूप थी तब तुम ही तो छांव  शीत थी लिखी थी किस्मत रब…

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क्रिएटिव पीपल ऑफ हरियाणा प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

चंडीगढ़, 4 मई। अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा द्वारा लॉकडाउन के दौरान प्रदेशवासियों की छिपी हुई प्रतिभा को सवारने और उन्हें एक मंच प्रदान करने के लिए आयोजित की गई क्रिएटिव पीपल ऑफ हरियाणा प्रतियोगिता के परिणाम आज घोषित कर दिए गए है। परिणाम जारी करते हुए समाज की साहित्य प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. इंदु गुप्ता ने…

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युवाओं में अतिरेक भविष्य की चिंता से बिगड़ रहा वर्तमान ..!

कैसी विडम्बना है कि आज हमारा देश विज्ञान से कटता जा रहा है। हम भूल रहे हैं कि धर्म से नौकरियां पैदा नहीं हो सकतीं, नेताओं के पीछे चलकर रोजगार पैदा नहीं हो सकते। केवल विज्ञान ही तय कर सकता है हमारा भविष्य। फिर भी, हम धर्म, मजहब, मंदिर, मस्जिद, हिंदू, मुसलमान, बेकार के, फालतू…

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कोरोना का कहर सताता

शीर्षक-कोरोना का कहर सताता देखो कोई आता न जाताकोराना का कहर सताता..यूँ शहरों में पसरा सन्नाटाभूल से भी भूला न जाता.. न मिलो किसी से न हाथ मिलाओदूर-दूर रहकर हर राब्ता निभाओये बुरा वक़्त ही तो पहचान कराताअपने और परायों में भेद बताताकोरोना का कहर सताता.. हैण्डशेक के रीति-रिवाज विफल हैकरबद्ध नमन की संस्कृति सफ़ल…

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मध्यमवर्गीय

जब जब भी तुम्हें ये लगने लगे मैं तुम्हारे करीब हूँ बात बतला दूँ, इश़्क तो धनवान है मैं बहुत गरीब हूँ । दुनिया घुमाने की ख़्वाहिश पूरी नहीं कर सकता हूँ अटूट वादा कर पूरी ज़िन्दगी बाहों में भर सकता हूँ । तुम्हारे हर छोटे बड़े फैसले में जरूर अपनी राय दूँगा सुबह अलसा…

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क्या हुआ तेरा वादा……….. ! – कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा राजनीति तो वायदों का ही खेल है । ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई राजनीति करे और वायदा न करे और फिर चुनावों में….चुनावों में तो वायदे पानी की तरह बहते दिखाई देता है, वह चुनाव चाहे सरपंच का हो या लोकसभा का । इतने वायदे किए जाते हैं कि वायदा करने…

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लघुकथा – 15 अगस्त और दादी माँ की आशाएं

          पंकज की दादी 15 अगस्त की सुबह जल्दी से ही तैयार हो गयी थी।जैसा कि उसे मालूम था कि 15 अगस्त पर सभी टीवी के समाचार चैनलों पर भारत देश के सैनिकों को दिखाया जाता है।हर बार की तरह वह भी अपने पोते पंकज की एक झलक पाने के लिए टीवी के सामने बैठ…

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