Latest Updates

गुजरात माॅडल से भयभीत नेता

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव भाजपा के ही नेता अब गुजरात माडल से भयभीत हैं । गुजरात माडल का रंग रूप् बदल चुका है । पहले गुजरात माडल को विकास के माडल के रूप् में परोसा जाता था, इस माडल से भाजपा के नेता प्रसन्न होते थे और शेष बचे बाकी नेता भयभीत होते थे…

Read More

ड्रोन की सदी

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ज़रिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। दुनिया को पाकिस्तान के नापाक इरादों से भी अवगत कराया गया। यह निश्चित रूप से वायु सेना की श्रेष्ठता का एक शानदार प्रदर्शन था, लेकिन सिर्फ़ इसी से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। चीफ ऑफ…

Read More

सचिन पायलट की ठंडी हुंकार

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सचिन पायलट ‘‘खोजी खबरदाता’’ के रूप् में उभर चुके हैं । सारे लोग उनके हर एक कदम को विशेष निगाहों से देखते हैं और हर शब्द का विश्लेषण कर अपनी नई सोच बनाकर परोस देते हैं । मीडिया को चाहिए ‘‘सबसे पहले’’ वाली न्यूज, इस के चक्कर में वे हर…

Read More

छोटी सी मुलाकात उपहार बन गयी

फिल्म डायरेक्टर श्री अशोक त्यागी जी से अद्भुत भेंट जी हाँ आदरणीय मित्रो फिल्म एक्टर / डायरेक्टर अशोक त्यागी जी से 3-4 बार फ़ोन पर बात हुई , मिलने की जिज्ञासा दोनों को थी कल शनिवार (पालिका केंद्र, कनाट प्लेस) में समय निश्चित हुआ और सहृदयता से भेंट हुई, उनको उत्कर्ष मेल (राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र)…

Read More

पिता को नमन और वन्दन करता हूँ (कविता 5)

जिनके मन की भाव तरंगें आसमान को छू आती थी जिनके अनुशासन की छाहै मेरी सत्य दिशा  दात्री  थी। जिसने मेरी अगुली पकडी और मुझे चलना सिखलाया जिसने धरती पर लिख लिख वर्णो  से  परिचय करवाया।। जिसने मुझको जीवन देकर  मानवता  का पाठ  पढ़ाया अन्तर्मन में ज्योति जलाकर अन्धकार से  बाहर  लाया ।। सत्य निष्ठ…

Read More

अब नहीं रही

घुमंतु परिवार में भीख के रोजगार में, वह चलने से लाचार टांगें  अब नहीं रहीं। रीते घड़े की पहेलियां दाना खोजती उंगलियां,  वह पेट की पीड़ाएं अब नहीं रहीं। दिन में लकड़ी बीनना रात के लिए सहेजना,  वो आग तापती रातें  अब नहीं रहीं। कलुआ कई दिनों से आया नहीं शहर से,  वो बेटे को…

Read More

माटी में मिल गई माफियागिरी   

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ‘‘जैसी करनी, वैसी भरनी’ यह कहावत तो सदियों से लोकमानस में गूंजती आ रही है और अनेक बार इसे चरितार्थ होते हुए भी देखा है । उत्तरप्रदेश का कथित डान अब इसे चरितार्थ कर रहा है । बबूल बोओगे तो कांटे ही पाओगे सो अीतक अहमद अब कांटों का ताज पहनकर चीत्कार कर…

Read More

ग़ज़ल,

शराफत हम से कहती है,शराफत से जिया जाए, कोई हद भी तो होती है,कहाँ तक चुप रहा जाए। ग़ज़ल से गुफ़्तगू हमने इशारों में बहुत कर ली, मगर अब दिल ये कहता है कि कुछ खुल कर कहा जाये। अभी ज़िंदा हैं हम साँसें भी अपनी चल रहीं हैं न, तो फिर क्यों ना बुरे…

Read More

गोइन्का पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

कमला गोइन्का फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का ने एक प्रेस विज्ञप्ति द्वारा बताया है कि दक्षिण भारत के हिन्दी साहित्यकारों के लिए निम्न पुरस्कारों की प्रविष्टियां मंगाई गयी हैं। जो हिन्दी भाषी साहित्यकार अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में पिछले 10 वर्षों या अधिक अवधि से हिन्दी साहित्य की सेवा व सृजन कर रहे हैं…

Read More

हो रँग यही अब फागुन का

कविता मल्होत्रा (स्तंभकार-उत्कर्ष मेल) वसँत ऋतु ने अब के बरस ये कैसी दस्तक दी है, चारों तरफ रक्त-रँजित फाग का मँज़र है। कहाँ गया वो मौसम जब हर पखवाड़ा वृँदावन की पावनता से महकता था। आखिर एैसा क्या हो गया कि आज सर्वोत्तम योनि पाकर भी मानव अपनी ही चाल भूल गया है। क्यूँ चाहिए…

Read More