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काश मैं मोबाइल होती

“काम बहुत था यार आज, बुरी तरह से थक गया हूँ।” – सोफे पर अपना बैग रखते हुए अजीत ने कहा।  “अजीत जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं चाय बना देती हूँ।”  “ठीक है, मधु! ” कहते हुए अजीत बाथरूम में चला गया। अजीत के फ्रेश होकर हॉल में आते ही माधुरी चाय-पकौड़े…

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कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की दूसरी रात

केएस इश्वरप्पा के भगवा झंडे वाले बयान पर कांग्रेस विधायकों का विरोध जारी है और इस क्रम में इन विधायकों ने शुक्रवार रात भी कर्नाटक विधानसभा में ही काटी। कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री केएस ईश्वरप्पा (KS Eshwarappa) के इस्तीफे की मांग के साथ राष्ट्रीय ध्वज के बारे में दिए गए उनके बयान…

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रेशमा

              रेशमा एक बहुत ही सीधी-सादी लड़की थी । जहां उसके साथ की लड़कियां फ़ैशन ,टीवी और मोबाइल में लगी रहती थी वहीं वह उम्र से पहले ही बड़ी हो चुकी थी। रेशमा का पिता शराबी था वह दर्जी का काम किया करता था परन्तु सारी की सारी कमाई अय्याशी और शराब पर लुटा दिया…

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कोरोना

फोकट में काहे का रोना। बड़ा नही है ये बगरौना।। अगर प्यार परिवार से है तो घर के बाहर पांव धरो ना।। नाक आँख मुंह टच मत करना। बार-बार हाथों को धोना।। देखो लॉकडाउन ना टूटे। जबरन घूमो, व्यर्थ मरो ना।। सामाजिक डिस्टेन्स बनाओ। बीच में आकर यार धसो ना।। बाहर जाओ मास्क लगाओ। भीड़भाड़…

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राज्यसभा में सपा-कांग्रेस ने उठाया बेरोजगारी का मुद्दा

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने मंगलवार को राज्यसभा में बेरोजगारी के कारण लोगों के आत्महत्या करने का मुद्दा उठाया। यादव ने मांग की कि नौकरी गंवाने वाले लोगों को प्रति माह 15,000 रुपये दिए जाएं। यादव की मांग का समर्थन करते हुए, कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा…

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करोना संकट से भुखमरी के कगार पर खड़ा प्राइवेट शिक्षक !

एक तरफ जहां प्राइवेट , नॉन रेगुलर  और अंशकालिक शिक्षकों को इस भयावह संकट काल में शिक्षण संस्थाओं ने वेतन देने से मना कर दिया है और भुखमरी के कगार पर खड़े ये प्राइवेट अध्यापक आज डिप्रेशन में जी रहे , वहीं दूसरी तरफ सरकार भी इन्हे भूल गई है क्योंकि ना इन्हे बेरोजगारों की…

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काफल (एक सत्य कथा )

(ये बात एक सच्ची घटना पर आधरित एक सच्चा लेख है़ ! जिसको की मैने जब सुना तो इस घटना को लिखे बिना नहीं रह पाया ! वेसे तो यहाँ कई घटनाए कहानियो का रूप ले चुकी है़ ! मानकों द्वारा ये भी नहीं की कभी इस घटना को मुद्रित नहीं किया गया होगा !…

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कौन बने शिव ?

बस्ती में अजीब सन्नाटा मरघट में कोलाहल ऐसा क्यों हो रहा जानकर भी हम सब अनजाने सद्ग्रन्थों को धरा ताक पर कर्म करें मनमाने यही दुराग्रह विष समाज में जगह-जगह पर फैला दिन-प्रतिदिन होता जाता है मानवअधिक विषैला झुलसातीं नित विष-ज्वालाएँ मानवता के तरु को कौन बने शिव? जो पी डाले सामाजिक हालाहल सभी व्यस्त…

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नववर्ष आ गया…….

बागों में कूके कोयल, भौरें विचर रहे हैं।बागों पे आया यौवन,कविमन खिल गए हैं।हरियाली से धरा का,सौन्दर्य बढ़ता जाए।नववर्ष आ गया है , ऋतुराज मुस्कुराए ।कलियाँ चहकती हैं,खुशियों से चमन गाये।ख्वाहिशें नई जगी है ,इरादे बदल गये हैं, ।रेतों के भी परिन्दे , हरियाली में मुस्कुराए।मंजिलों के नए सपने , अब जन्म ले रहे हैं…

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वृद्धाश्रम नहीं, सम्मानाश्रम चाहिए

लेखक : विजय गर्ग समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुज़ुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। आज जब जीवन की गति तेज़ हो गई है, रिश्तों में व्यावहारिकता ने भावनाओं की जगह ले ली है, तब हमारे सामने एक दर्दनाक सच्चाई उभरकर आई है — वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या।…

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