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पितृदिवस पर कनाडा से “मनस्विनी” समूह के सभी सदस्यों के सहयोग से स्वरचित पंक्तियां

न मेरी आंख ही फड़कीन ही हिचकियाँ आईंमगर फिर भी यें लगता हैंकि कोई याद करता हैं….वो ओर कोई नहीं मेरे पापा…पापा की दुलारी,थोड़ी बिगड़ी, थोड़ी प्यारीसुबह जल्दी जगाते हैं पापा,नौ बजे रात मैं बत्ती बुझाते हैसदैव याद में आतेमेरे प्यारे पापाउनकी दिलचस्प बातेंज्ञान से भरी नसीहतेंउनकी किताबों का भंडारअनुशासन में छिपा प्यारमेरे प्यारे पापापापा…

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आजादी का 75वीं वर्षगाँठ हिंद माननेवाला है,

.डॉक्टर सुधीर सिंह [शेखपुरा , बिहार] आजादी का 75वीं वर्षगाँठ हिंद माननेवाला है, किंतु तू-तू, मैं-मैं से संसद कभी न आजाद रहा। बहस के लिएआवंटित संसद का बहुमूल्य वक्त, राजनीति के दांवपेंच  में बेवजह ही फंसा रहा। हिंदुस्तान के अवाम  की मेहनत की कमाई को, लोग गुलछर्रा  उड़ाने में ज्यादा मनमानी न करें। कोई न…

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कृष्णा शर्मा जी की 2 रचना एवं परिचय

तकदीर की लकीरें” कौन आज आया तकदीर का, दरवाजा खटखटाने बता दे मुझे। कैसी है ये दस्तक जिंदगी में, कोई तो बता दे मुझे। तकदीर की लकीरें अजीब है, कौन पढ़ें आज इनको यहाँ। लकीरों में उलझी तक़दीर मेरी, कोई तो बता दे मुझे। कौन है जो मेरी तकदीर के, दरवाजे पर आज है खड़ा।…

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“अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस “ की बहुत बहुत बधाई

हम महिलाओं को अपने वजूद का एहसास स्वयं ही करवाना होगा सभी महिलाओं को “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस “ की बहुत बहुत बधाई महिलाओं को समर्पित कुछ पंक्तियाँज़िम्मेदारी संग नारी भर रही है उड़ान ,ना कोई शिरकत ना कोई थकानमहिलाओं को दे इतना सम्मान ,जिससे बढ़े हमारे देश की शान ।महिलायें दो परिवारों की शान बान…

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नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल देवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील समझ के लिए तैयार है? नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है।  पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं। बहुत जगह कन्याओं का शोषण होता…

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आपके आने के बाद

हो गये मौसम सुहाने, आपके आने के बाद, हो गई हर ऋतु बसंती,आपके आने के बाद। नींद कोसों दूर जाकर बैठ जाती आंखों से, ख्वाब सूखे पत्तों की मानिंद झड़ते शाखों से। हो गए सपने सलौने,आपके आने के बाद, नींद मीठी हो गई है,आपके आने के बाद।। मिट गई मीलों पुरानी दूरियां इन दिलों की,…

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अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस पर विशेष “किताबों के पन्नों से लेकर अनकही कहानियों तक”

“किताबों के पन्नों से लेकर अनकही कहानियों तक”… वो दोस्त जो हमारी डायरी के हिस्से होते हैंUmaMehtaTrivedi, freelance writer, Karnataka ​जिंदगी की किताब में कई पन्ने ऐसे होते हैं जो कोरे छूट जाते हैं,लेकिन कुछ पन्नों पर शब्दों की जगह कुछ खास लोगों के हस्ताक्षर होते हैं। अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर जब हम…

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ट्वेंटी – ट्वेंटी फाईव में बड़का वेलकम

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी दिसंबर खत्म और ये जनवरी इस साल फिर से शुरू हुई और अबकी साल 2025 में बस नीतीश चचा के पलटने का इंतजार है अथवा मफलर मैन के फेयरवेल का आयोजन सुनिश्चित हो जाए या फिर दोनों में से कौनो एक काज हो जाए तो…

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दिल्ली धमाका से दहशत में  लोग

राजनीतिक सफरनामा दिल्ली धमाका से दहशत में  लोग :   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव दिल्ली धमाके ने दहशत का माहौल बना दिया । विगत अनेक वर्शो से दिल्ली ऐसे धमाकों से दूर थी । इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला आतंकवादियों को वह माड्यूल है जिसमें पढ़े-लिखे डाक्टर शामिल हैं । पूरी गैंग डाक्टरों की ही है…

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राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग

स्वतंत्र, कानून का पालन करने वाले संस्थान आवश्यक जांच और संतुलन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मजबूत और लचीले लोकतंत्रों के लिए अंतिम आधार प्रदान करते हैं। हाल ही में, भारत में समाज के कमजोर वर्गों द्वारा विरोध की कई घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा, असहमति के दमन की प्रकृति कानून प्रवर्तन…

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