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गुरूकुल

श्रीमती कविता मल्होत्रा दोस्तों मित्रता दिवस की रस्म हम यूँ निभा लेते हैं निस्वार्थ प्रेम बनकर निस्वार्थता को मित्र बना लेते हैं अपने घरौंदों की जड़ें दिमाग़ में न बनाकर दिलों में बनाई जाएँ तो हर एक घर ही मंदिर हो जाए !! दिलों को अपनी ख्वाहिशों की सियासत नहीं बल्कि जीवन के परम उद्देश्य…

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कोरोना को हल्के में लेना, कितना भारी पड़ रहा है

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) कोरोना को हल्के में लेना हम सबको कितना भारी पड़ रहा है । हमने भी, सरकारी तंत्र् ने  भी, स्वयंसेवी संस्थाएं भी बार–बार निवेदन करती रहीं कि 2 गज की दूरी मास्क है जरूरी, कम से कम तब तक तो अवश्य ही जब तक कोरोना भारत से पूरी तरह से…

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जीवन का आनँद होने न पाए मँद

(कविता मल्होत्रा) दिशाहीन दौड़ मत दौड़ोअपनों का हाथ मत छोड़ो✍️जैसे-जैसे लॉकडाऊन खुलने लगा है, वैसे-वैसे मार-काट, चोरी-डकैती और आपसी भेदभाव के सर्प सर उठाने लगे हैं।कोरोना-काल के इतने बड़े बवंडर के बाद भी लोगों को अराधना का साफ आसमान दिखाई नहीं पड़ रहा है।क्या दीप जला कर मंत्रोच्चारण करने से ही ईश्वर की अराधना संपूर्ण…

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चर्चा का वो विषय बना ,

चर्चा का वो विषय बना , नाम जोशी मठ। शहर धर्म कर्म की भूमि वो, राज्य उत्तराखंड जिला चमोली। जन जन करता बातें उसकी, क्या हुआ है ऐसा आज दीवारे दरक रहीं, जमीन धस रहीं, बेघर हुए लोग रातों रात। क्या मुद्दा सिर्फ़ इतना है, या अन्य कोई गहन आशंका है। रेलवे हो प्रयाग प्रोजेक्ट,…

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विकास की रफ़्तार में पिछड़ रहा पश्चिम बंगाल, यूपी का भी हो पुनर्गठन

     पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  यूपी सीमा का दायरा बड़ा है, अलग पूर्वांचल राज्य जरुरी हो गया है क्यूंकि यहां के  लोग  किसानी और बेरोजगारी से तंग आ चुके है। युवा पलायन कर रहें। वहीं पश्चिम बंगाल के कई जिले मुख्य धारा से अलग थलग पड़े है । दोनो राज्यों…

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आलोकित रहे हिंदुस्तान

सलामत   रहे  सारा जहान। दिलों   में  बचा  रहे  ईमान। आसमां के सितारों की तरह, आलोकित रहे  हिंदुस्तान।। छल बल से नहीं चलता देश, कुटिल रावण-सा धरो न वेष। कुछ  गुंडों के कोलाहल से, कभी बदलता नहीं परिवेश। नभ  में कितने मेघ  घने हों, परंतु  सूर्य  निकलता ही है। सत्य  पर कई  परदे  डालो, लेकिन सत्य…

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स्वतंत्रता का अधूरा आलाप

आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था।…

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शिवसेना की फजीहत !

राजनीति के द्वंद्व मे फँसी शिवसेना महाराष्ट्रा मे आजकल बिना पेंदी के लोटा हो गयी है । धृतराष्ट्र बने ऊधव ठाकरे , बेटे आदित्य को सी ऍम बनाने के लिए हर विचारधारा को मानने को तैयार बैठे है ।  यकीन नही होता की जिस बाला साहेब ठाकरे ने मातोश्री से राजनीति की शुरुआत की और…

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“एक पेड़ मां के नाम लगाएं…” : पीएम मोदी

‘मन की बात’ नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के बाद किये गए पहले ‘मन की बात’ रेडियो प्रोग्राम के 111वें एपिसोड में कहा कि मैंने कहा था, चुनाव नतीजों के बाद फिर मिलूंगा, उम्‍मीद करता हूं कि आप सब अच्‍छे होंगे. मैंने विदा लिया था, फिर मिलने के लिए. इस बीच मुझे…

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होली खेलते हैं

होली खेलते हैंचलो हम होली संग खेलते हैचलो हम होली रंग खेलते हैबसंत ऋतु में फागुन माह मेंचंग की थाप पर खेलते हैइंद्रधनुषी रंग बरंगी गुल फूल खिलेभंवरा गीत गुनगुनाते होली खेलते हैलहंगा-चोली भीगी रंगा सारा बदनमुखड़े पर लाली होली खेलते हैंनाचें गीत फाग गाये संग सखियांअखियां चमके काजल होली खेलते हैंहोलिका जली मची खलबली…

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