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चुनौती है बढ़ता तापमान, बदलता वायुमंडलीय पैटर्न।

वैश्विक समुद्री बर्फ में खतरनाक गिरावट को रोकने के लिए जलवायु कार्यवाही निर्णायक होनी चाहिए। अनुकूली नीतियों और बेहतर ध्रुवीय निगरानी से जलवायु लचीलापन बढ़ेगा। एक टिकाऊ भविष्य उत्सर्जन को कम करने और ग्रह के नाज़ुक क्रायोस्फीयर की रक्षा करने के लिए सभी के दृढ़ संकल्प पर निर्भर करता है। कई समुदायों में जलवायु परिवर्तन…

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भगवान महावीर के उपदेशों का प्रचार करने वाली पुस्तक के लिए Rs.2 लाख का पुरस्कार

भगवान महावीर फाउंडेशन द्वारा 15/02/2025 को डॉ. नेमीचंद जैन मेमोरियल अवार्ड विजेता की घोषणा की गई। प्रोफेसर भागचंद्र जैन “भास्कर” द्वारा लिखित “जैन सांस्कृतिक चेतना के स्वर” को चौथे डॉ.नेमीचंद जैन मेमोरियल पुरस्कार के लिए पुरस्कार विजेता के रूप में चुना गया है। पुरस्कार में 2 लाख रुपये की नकद राशि, एक स्मृति चिन्ह और…

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वीआईपी कल्चर

बेटी के स्कूल का एनुअल फंक्शन था। रितिका जाना भी नहीं चाह रही थी लेकिन बेटी को प्राइस मिलना था इसलिए उसे जाना पड़ा। 6:00 से फंक्शन स्टार्ट था शाम को। इसलिए समय से ही चली गई। ऑडिटोरियम में चार लाइन कुर्सियों की वीआईपी के लिए रिजर्व कर रखी थी जिन पर सफेद कवर भी…

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लाडला मुख्यमंत्री बोलकर राज्य और राजनीति छीन लेती है भाजपा

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी आपको याद होगा कभी शिवराज सिंह लाडला मुख्यमंत्री हुआ करते थे, उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति छोड़नी पड़ी, वसुंधरा राजे लाडली मुख्यमंत्री हुआ करती थी, उनकी जगह एक नए चेहरे को बिठा दिया गया , कभी एकनाथ शिंदे लाडले मुख्यमंत्री हुआ करते थे और पॉवर में…

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

नारी है भारत की शान  बढ़ाती है जग में सम्मान  सनातन ग्रंथ पढेगी  नया इतिहास गढ़ेगी । जानकी है शक्ति का नाम जिनसे बने राम है राम सावित्री के पति सत्यवान छीन के लाई यम से प्राण।  ब्रह्मा और विष्णु महेश परीक्षा लेने गए विशेष अनसूया सी पावन नार बनाकर बालक झूले डार। राधा मीरा…

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तांटक छन्द

दुख में दीनानाथ हमेशा, साथ खड़े हो जाते हैं। होते वही सहायक सबके, काम सभी के आते हैं। आता है जो जीव शरण में,भवसागर तर जाता है। दयासिंधु के धाम सहज ही, मानव वह जा पाता है। जपले हरि का नाम सखी री, माया एक झमेला है। चारदिनों का जीवन खाली, बस इतना ही खेला…

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मोहन राकेश शताब्दी वर्ष के बहाने

अमृतसर में सौ साल पहले मदन मोहन गुगलानी के नाम से एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार में जन्मे मोहन राकेश एक बेहतरीन लेखक थे, जिन्होंने कई विधाओं- कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, अनुवादों, यात्रा-वृत्तांतों, आलोचना और व्यक्तिगत डायरियों में कथा-रचना करने की कोशिश की और कहानियों और नाटकों के क्षेत्र में विशेष रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अमृतसर…

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भाषायी सम्पदा से परिपूर्ण भारतीय भाषाएँ

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा भाषायी सम्पदा से परिपूर्ण भारतीय भाषाएँ हर काल और परिस्थिति में समृद्ध हैं। भारत के महान संतों, भक्ति कालीन कवियों, लोक-गायकों, मनीषी विद्वानों ने सभी भारतीय भाषाओं में ऐसा अद्भुत साहित्य सृजन किया जिसमें जगत कल्याण की भावना ने शब्द को ब्रह्म सिद्ध किया और आध्यात्मिक चेतना के स्तर तक पहुंचा दिया।…

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तुम फागुन ही फागुन हो

गूंथ लिया सारा बसंत अपने जूड़े में , मौसम कहता है तुम फागुन ही फागुन हो। होटों से लिपट लिपट मखमली हंसी तेरी, दूधिया कपोलों का चुंबन ले जाती है। झील के किनारों को काजल से बांधकर, पनीली सी पलकों में सांझ उतर आती है। महावरी पैरों से मेहंदी रचे हाथों तक, छू छू कर…

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जीवन में बढ़ता हुआ “विकल्प “ सही या ग़लत ?

आधुनिक युग में जीवन में बढ़ता हुआ विकल्प चुनौतियां लेकर आता है ,चुनौतियों को अस्वीकार करना ही जीवन संघर्ष बन जाता है और तब जीवन में विकल्प की कमी हो तब विकल्प ढूँढो ताकि जीवन में एक नए मौके मिलतेरहे ….क्योंकि नए मौके जीवन को नई उम्मीद के साथ जोड़कर जीवन को सफलता की ओर…

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