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राममय होता भारत

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सारा देष राममय हो गया है । होगा भी क्यों नहीं नए बने राम मंदिर में भगवान राम विराजने वाले हैं । इस पूरे ायोजन के इस तरह से प्रचारित और प्रसारित किया गया कि हर कोई अपने अंदर बैठे राम के साथ एकमेव होने लगा । हर कोई भव्य राम मंदिर…

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सात अजूबे (Seven Marvels)

यह एक उपाधी है जिसे प्राचीन समय से ही विश्व के अद्वितीय और अद्वितीय स्थानों को सूचीबद्ध करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इन “सात अजूबों” को दुनिया के सबसे अद्वितीय और श्रेष्ठ रचनात्मक कारणों के रूप में माना जाता है। ये हैं: ताजमहल (ताज महल) – भारत: भारत के आगरा शहर में स्थित…

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२१वीं सदी में विश्व में हिंदी भाषा की स्वीकृति

#hindi #hindibhasha 21वीं सदी में हिंदी भाषा का महत्व और स्वीकृति विश्वभर में बढ़ रहा है। यह भाषा न केवल भारतीय उपमहाद्वीप में, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही है। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे 21वीं सदी में हिंदी भाषा को विश्वस्तरीय स्तर पर स्वीकृति मिल रही है। हिंदी भाषा…

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लुईस ब्रेल के आविष्कार ने दृष्टिबाधित दिव्यांगों की शिक्षा में क्रांति को जन्म दिया

#(विश्वब्रेलदिवसपरविशेष) भगवान द्वारा दिया गया सबसे कीमती उपहार इस रंगीन और खूबसूरत दुनिया को देखने की क्षमता है। अफसोस की बात है कि दुनिया में हर कोई इसे नहीं देख सकता। हालांकि 1829 में लुई ब्रेल ने ब्रेल का आविष्कार करके अपने अंधे समाज को एक महान उपहार दिया। हर साल 4 जनवरी को विश्व…

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नव वर्ष 2024 की बधाई : सम्पादकीय

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ नववर्ष 2024 आपके तथा आपके परिवारजनों के लिए, पूरे राष्ट्र के लिए शुभ हो, यही कामना और मेरी प्रभु से प्रार्थना है । कुछ नयापन करने के लिए प्रतिदिन नये उत्साह के साथ अपने कर्म पर जुट जाते हैं और बात जब पूरे वर्ष की हो, नए वर्ष में प्रवेश करने की…

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अनुभवों का नया पिटारा खोलता  नव वर्ष 2024 ..!

एक और आंग्ल वर्ष 2023 समाप्त हो चूका है और आंग्ल नव वर्ष 2024 का दस्तक हुआ है यह वर्ष राम मंदिर स्थापना और लोकसभा चुनावों की भेंट चढ़ने वाला है। उधर कुछ लोग जान बूझकर दिवाली होली  क्रिसमस का विरोध ऐसे करते हैं जैसे उन्होंने देश का ठेका ले रखा है। उत्तर भारत में…

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नये साल का रोचक इतिहास

लाल बिहारी लाल नव वर्ष उत्सव  मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 21 मार्च को मनाया जाता था, पर रोम के शासक जुलियस सीजर ने ईसा से 45 ई. पूर्व जूलियन कैलेंडर की स्थापना विश्व में पहली बार की तब ईसा पूर्व इसके 1 साल पहले का वर्ष…

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नए साल की नई सुबह : राजनीतिक सफरनामान

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव नए कैलेण्डर के नए वर्ष के सुनहरे पन्ने पर दर्ज नए साल के भावो को अंगीकार कर सूरज की शीतल रष्मियों से आल्हादित आंगन की भोर में नया भले ही कुछ भी न हो पर मन में नएपन का उत्साह अवश्य होता है । चिड़ियों की सहक तो पुरानी ही है पर…

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सत्य की खोज : आशा सहाय

दिनांक– बारह दिसम्बर दो हजार तेइस।–नवभारत टाइम्स मे 'द स्पीकिंग ट्री' के अन्तर्गत श्री जे. कृष्णमूर्ति के कुछ विचार पढ़े जिन्होंने मुझे सोचने को प्रेरित करते हुए बहुत हद तक सहमत होने पर विवश किया। उनके विचार सत्य की खोज पर आधारित थे । उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सत्य की खोज…

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पुस्तक परिचय : शब्दों की बीज

स्त्री-विमर्श के नव मूल्य स्थापित करती कविताएँ अनिता कपूर जी की कृति *शब्दों के बीज* हाथ में है शीर्षक पर ही देर तक नज़र ठहरी रही। मन में एक मंथन इस शीर्षक को लेकर देर तक चला। कई प्रकार के विचार आ- आकर मन की चौखट पर दस्तक देने लगे। आख़िर क्या है शब्द बीज?…

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