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प्रेम की संपूर्णता–डॉ शिप्रा मिश्रा
प्रेम में ऊब-डूब मत देना गुलाब जो मुरझा जाएँ किताबों में रखे सुषमा सौंदर्य मौलिकता सब भूल जाएँ देना इत्र में भीगे गुलाबी पत्र जिसे नोटबुक में पढ़ा जा सके नजरें बचाकर जब जहाँ जैसे जी चाहे रखा जा सके सहेजकर उन तमाम प्रेमी युगल के लिए जानते हैं जो प्रेम की मौन मूक…
मैं कैसे पढ़ूँ?
रोहन बड़े ही सहज भाव से पास आकर खड़ा हो गया,“मैम आप कहती तो हैं कि तुमलोग डॉक्टर, इन्जीनियर ,शिक्षक कुछ भी बन सकते हो, परंतु हमारे यहाँ तो दो जून का भोजन भी मुश्किल से बनता है, हमारे माँ-बाप हमें कहाँ से डॉक्टर और इन्जीनियर बनायेंगे? उसमें तो बहुत अधिक पैसे लगते हैं।”…
काल और उसके रहस्य : आशा सहाय
जब कब अब और तब जैसे शब्द निरर्थक हैं अगर इनके साथ काल नहीं जुड़ा हो।पूर्वोक्त शब्दों से हम काल को मापने का दम्भ भरते हैं। वस्तुतः भौतिक दृष्टि से इसे मापना अत्यंत कठिन है। यह अपनी व्यावहारिक सुविधा के लिए करना चाहते हैं ताकि दो घटनाओं के मध्य की स्थिति को हम मस्तिष्क मे…
नायब सिंह सैनी – एक कुशल मुख्यमंत्री
नायब सिंह सैनी – एक कुशल मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार का एक साल का सफर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का बोलने का अंदाज़ लोगों को बेहद आकर्षित करता है, ये सहज और सरल तरीके से गंभीर बात कह जाते हैं। ये 12 मार्च, 2024 से हरियाण के मुख्यमंत्री हैं, 2024 का हरियाणा विधान सभा चुनाव इनके…
बुद्ध का सदियों का सफर
जैसे-जैसे बौद्ध दर्शन समय के साथ-साथ बदलता गया, वैसे-वैसे बौद्ध कला भी बदलती गई। परंपरा के शुरुआती दौर में, बुद्ध को कभी भी मानव रूप में नहीं दिखाया गया। बल्कि, उनकी उपस्थिति को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया। पैरों के निशान, एक बोधि वृक्ष या यहाँ तक कि एक साधारण पगड़ी – ये उनकी छवि…
हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर महर्षि यूनिवर्सिटी में विशेष व्याख्यान और पुरस्कार वितरण
महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी, नोएडा के मीडिया विभाग में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 16 सितम्बर को *“डिजिटल मीडिया में हिंदी की ताकत और संभावनाएँ”* विषय पर विशेष व्याख्यान और पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार, संपादक एवं प्रकाशक श्री मनमोहन शर्मा (शरण) रहे। उन्होंने अपने अनुभव साझा…
युवाओं के आक्रोश में झुलसा नेपाल
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक और पड़ोसी देश युवाओं के आक्रोश का केन्द्र बिन्दु बन गया । श्रीलंका के बाद बंगलादेश और अब नेपाल में युवाओं ने हिसंक आन्दोलन कर सत्ताधीशों को कुर्सी से उतार दिया । नेपाल में लोकतंत्र ज्यादा पुराना नहीं है, इसके पूर्व राजशाही थी और नेपाल का एक बड़ा वर्ग मानता रहा…
डॉ.राहुल को हिन्दी शलाका सम्मान
साहित्य मंडल संस्था,श्रीनाथद्वारा के तत्वावधान में 13-14 फरवरी को समायोजित समारोह में “हिन्दी शलाका सम्मान” प्रदान करने की घोषणा की गई है। तदर्थ, श्रीनाथजी के नमन करते हुए संस्था के प्रधानमन्त्री श्री श्यामप्रकाश देवपुराअन्य पदाधिकारियों के प्रति विशेष आभार। राहुल जी समकालीन हिन्दी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। उनकी कृतियों सामाजिक चेतना…
सुधार : सरकारी स्कूलों के बच्चों को ही सरकारी नौकरी में लाइये…..!
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी यह सितंबर माह शिक्षक दिवस के लिए जाना जाता है। किन्तु वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का जो हाल है वह बेहद दयनीय और चिंताजनक है। पहले तो उन सभी शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करता हूँ जो आज भी स्वयं सरकारी मास्टर है, अस्सी हजार के…
स्वतंत्रता का अधूरा आलाप
आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था।…
