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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: एक संक्षिप्त विश्लेषण

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025, दिल्ली की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि यह चुनाव राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों का मिलाजुला रूप होगा। दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में चुनाव होंगे, और यह दिल्ली की भविष्य की दिशा तय करेंगे। पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, लेकिन इस…

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( हास्य कविता ) मेरे पति

1 जब जब बीमार मैं पड़ती हूँ पति मेरे प्रेम पूर्वक रूबाब मुझे दिखाते है ख्याल नही रखती अपना सैर भी तेरी बंद है दूर मैं तुमसे रहता हूँ फ्रिक तुम्हारी करता हूँ नौकरी छोडूँ , घर बैठूँ बोलो , तुम क्या कहती हो 2      जब जब बीमार मैं पड़ती है पति मेरे  , दोस्त…

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मैच फिक्सिंग ( हास्य कविता )

मैच खिलाड़ियों का फील्डिंग में होता था , देखो , हारकर भी खिलाड़ी चैन से सोता था , हम सोचते थे पहले ,हर मैच में ही हार होती है , क्या समझते थे हम कि , जिंदगी दुशवार होती है । जीतते है तो बस दुनियाँ में ही नाम होता है , मिलते है कम…

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जीवन के वृक्ष  को जीवन्त रखना है,

जीवन के वृक्ष  को जीवन्त रखना है, प्रेम के पानी से उसे  सींचते रहना है। उसको सुखाता  है नकारात्मक सोच, शुभ सोच  से सदा हराभरा रखना है। अहंकार की ऊष्मा विष के समान है, जो जीवन को  विषाक्त  कर  देता है। जो  सीख लिया है दंभ को दुत्कारना, मजेदार जीवन का वह मजा लेता है।…

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हमारी शान है हिंदी (गीत)

हमारी शान है हिंदी हमारा मान है हिंदी मेरी नज़रों से देखो तो हमारी जान है हिंदी विधाता ने दिया अद्भुत हमें वरदान है हिंदी हिंदी है तो हिन्दुस्तान हिंदुस्तान है हिंदी। सुनो माँ भारती का धानी परिधान है हिंदी जिसे माना ज़माने ने अटल वो ज्ञान है हिंदी वीरों की शहादत का मान सम्मान…

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तुम कहाँ नही हो ?

चलो ढूढ़ कर, दिखाओ मेरे एहसासो में तुम कहाँ नही होकोई ऐसी जगह बताओ जहा तुम नही हो थक जाओगे मन की नगरी चलते चलतेमान लोगे हार जो पाओगे हर जगह खुद कोचलो ढूढ़ कर दिखाओ मेरे एहसासो में तुम कहाँ नही हो ऐसे हीं तो तुम तब हार गए थे जब कररहे थे मेरी…

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मैं शिव तो नहीं : महेंद्र शर्मा (हास्य कवि)

मैं शिव तो नहीं, जो पी जाऊं गम के हलाहल को। आंसुओं का अथाह सागर क्या कभी सूख पाएगा? कहने को सभी कहते हैं-दुख के पश्चात् सुख मिलता है, प्रत्येक रात प्रभात के समझ दम तोड़ देती है। रामायण में तुलसीदास ने लिख दिया है, ‘सब दिन होत न एक समाना। मैं नहीं मानता इस…

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तन

मत कर तन का घमंडये तन तो नश्वर हैहंसखेल कर पूरी करले जीवन यात्राइस तन को एक दिन मिट्टी में मिल जाना है | मत भटक दर-दरमिलना और बिछुड़नासृष्टि का यही नियम है | आत्मा सुखमय तो सारा जग सुखमयसुख-दु:ख दिन रात का खेलसुख बाहर नहीं,छिपा बैठा है स्वयं के ही भीतर | इच्छाओं को…

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कोरोना’ के कारण तबाही-ही-तबाही है

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘कोरोना’ के  कारण तबाही-ही-तबाही है, गाँव से शहर तक  बेरोजगारी बढ़ गई है. गंभीर चुनौती है गरीबों के लिए रोजगार, विकास की सारी  योजनाएं कुहर रही है. असंभव को संभव करने वाला कामगार, भुखमरी के कगार पर खड़ा दिख रहा है. विकास के कार्य में जुटे मजदूरों के लिए, अपना पेट पालना…

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है याद मुझे माँ (कविता-10)

याद नहीं कब मैंने माँ तुझ में ली अंगड़ाई थी जीवन जीने हेतु तन से तेरे मीठी अमृत पाई थी तूने ही मेरे हाथों में सबसे पहले कलम थमाई थी है याद मुझे माँ ऊँगली थामे स्कूल छोड़ने आई थी सबसे प्रिय वो लाल साड़ी जो तूने स्वयं सजाई थी जिद कर मैंने तुझसे उसकी…

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