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हिन्दी हमारी धरोहर हैं इस पर हमें गर्व करना चाहिए

हिन्दी दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष चौदह सितम्बर को मनाया जाता है। हिन्दी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और अपने आप में एक समर्थ भाषा है। विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा भी है, अतः इसके प्रति अपना प्रेम और…

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साहित्यिक गुरुओं , अध्यात्मिक जगद्गगुरु एवं साहित्यिक विभूतियों ने किया 11 पुस्तकों का लोकार्पण

नयी दिल्ली ( 8 जुलाई (शनिवार), गाँधी शांति प्रतिष्ठान , आई टी ओ, दिल्ली में अनुराधा प्रकाशन द्वारा पुस्तकों का लोकार्पण, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया , आयोजन में प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज , प्रोफेसर (ग्रुप कैप्टेन) ओ पी शर्मा जी (महानिदेशक-महर्षि विश्विद्यालय, नॉएडा), श्री पवन…

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आज अंगूठी ढूंढ रही है

जीवन के आमंत्रित सुख अब,निर्मोही दुष्यंत बन गए। मेरे गीतों में शकुंतला आज अंगूठी ढूंढ रही है । मृगछोंनों सी मृदुल फ़ुहारें, झुलसा देतीं हैं हथेलियां, सांसों की बुझती बाती की, तम ने छीनी हैं सहेलियां। मन के काण्वाश्रम में स्मृति क्षण,विरह होम के मंत्र बन गए, तन की समिधा में शकुंतला आज अंगूठी ढूंढ…

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महारोग कोरोना नियन्त्रण के कतिपय उपाय

हम सभी व्यक्तिगत अनुभव तथा समाचार संचार माध्यमों के द्वारा नित्यप्रति कोरोना महारोग के बढ़ते प्रकोप , भयावहता  तथा घातकता से परिचित है. इसकी विस्तृत विवेचना की आवश्यकता नहीं है. देश का विशाल भूखण्ड इस महदापदा से ग्रस्त है. जीवन का प्रत्येक  क्षेत्र तथा क्रिया कलाप अस्त व्यस्त तथा बाधित हैं. इस अभूतपूर्व विकराल संकट…

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ट्वेंटी – ट्वेंटी फाईव में बड़का वेलकम

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी दिसंबर खत्म और ये जनवरी इस साल फिर से शुरू हुई और अबकी साल 2025 में बस नीतीश चचा के पलटने का इंतजार है अथवा मफलर मैन के फेयरवेल का आयोजन सुनिश्चित हो जाए या फिर दोनों में से कौनो एक काज हो जाए तो…

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बरसी एैसे प्रभु कृपा,दिलों से दिल की बात मिली उमड़ा सावन हिंदी भवन में स्नेह की सौग़ात मिली

इसे प्रभु कृपा नहीं तो और क्या कहा जाए, जब विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अभिन्न रचनाकारों ने, अपने लेखन से अनुराधा प्रकाशन को साहित्यिक समृद्धि देकर, इस काबिल बनाया कि एक साथ 15 पुस्तकों का लोकार्पण सँभव हो पाया। 21 जुलाई 2019 का दिन अनुराधा प्रकाशन के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन कर आया, जिसमें…

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मेरे ज़रूरी काम

जिस रास्ते जाना नहीं हर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ। मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। जिस घर का स्थापत्य पसंद नहीं उस घर के दरवाज़े की घंटी बजाता हूँ। मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। कभी जो मैं करता हूं वह बेहतरीन है वही कोई और करे…

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हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं है : -अनिता कपूर (अमेरिका)

हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं हैयह है भावों की अभव्यक्तिहिन्दी तुमदिव्य भुवन भास्करकरबद्ध वंदन अभिनन्दनहिन्दी तुमतुम्हारे पदचिह्न पर जब-जब चले हमतुम ने जोड़ा हमें अपनी माटी सेहिन्दी तुमएक भाषाएक फोटो फ्रेम जैसीफ्रेम में जड़ी हैं हमारी पहचानमान अभिमानअभिनंदन अपनी संस्कृतिहिन्दी तुममाथे की हो चंदन रोलीतुम माला हो रुद्राक्ष कीपहना कर सबकोकर दिया है ज्ञानालोकितहिन्दी तुमको मान…

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सोच बदलनी होगी।

गीता—अध्याय3 श्लोक5 न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठतिकर्मकृत। कार्यते ह्यवशःकर्मसर्वःप्रकृतिजैर्गुणैः।। श्लोक का दूसरा पद द्रष्टव्य है जिसमें इंगित है कि सारा मनुष्य समुदाय प्रकृतिजनित गुणों द्वारा परवश हुआ कर्म करने को बाध्य किया जाता है।इसी सन्दर्भ में एक अन्य श्लोक है– नियतं कुरु कर्म त्वम कर्म ज्यायो ह्यकर्मनः। शरीर यात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः।।–श्लोक-8 –तू…

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परिवार के वट वृक्ष – पिता

पिता एक ऐसा शब्द जिसके बिना किसी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक ऐसा पवित्र रिश्ता जिसकी तुलना किसी और रिश्ते से नहीं हो सकती है। यह सत्य है कि हमेशा माँ के बारे में ही लिखा जाता है । हर जगह माँ को ही स्थान दिया जाता है पर हमारे…

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