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कानून के साथ लिंग संवेदीकरण महिलाओं के लिए अच्छा साबित हो सकता है

लैंगिक भेदभाव का मूल कारण भारतीय समाज में प्रचलित पितृसत्तात्मक मन है. हालांकि अब ये शहरीकरण और शिक्षा के साथ बदल रहा है, फिर भी एक के लिए लंबा रास्ता तय करना है. सामाजिक कंडीशनिंग और कठोर लिंग निर्माणों की घटनाओं के कारण असमान संतुलन बना हुआ है) —-प्रियंका सौरभ रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,…

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नारी स्वाभिमान

तूने अपने घूंघट को आसमां बना लियाऊँची थी उड़ाने पर घूंघट में थाम लियापलके झुकी और हुनर को हाथों में सजा लियाऔर अपने सपनों का आसमां खुद ही बना लिया। अकेले नही सबको साथ लेकर चली वोस्त्रीत्व का मकसद सबको समझा दिया।आई थी मुसीबत,राह में अनेकोदेख तेरा ओज उन्होने ठिकाना बदल लिया। बना ली है…

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स्वार्थ निहित राष्ट्रवादियों से सावधान ..!

राष्ट्रवाद के निमित्त देश हित में सामाजिक  रंग और भावना कैसा है,कोई इसे हनुमान की तरह सीना फाड़कर नहीं दिखा सकता। राष्ट्रवादी होने का कोई गीत नहीं गाया जा सकता। राष्ट्रवाद अपने आप में एक जज्बा है, जूनून है जिसे मौक़ा मिलने पर पूरी ताक़त से दिखाया जाना चाहिए ना की पहले भारत तेरे टुकड़े…

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बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।।

जीवन में सफल होने के लिए धैर्य रखना और अपने सपनों के लिए समर्पित रूप से कड़ी मेहनत करना महत्वपूर्ण है। जीवन में कुछ भी मुफ्त नहीं है, और इसलिए हमें जीवन में बड़ी चीजें हासिल करने के लिए अपने सभी प्रयास करने और अपनी सीमाओं को चरम तक पहुंचाने की जरूरत है। इसके अलावा,…

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श्रीगणेश

           कुन्दन अपने माँ बाप का इकलौता बेटा था । दुबला पतला साँवला सा पर नाक -नक्श सुन्दर था ।उसका मन हमेशा खेल में ही लगा रहता पढ़ाई तो उसे बोझ ही लगती थी । हमेशा अपने पिता से डाँट खाता रहता था पर उसमें जरा भी सुधार नहीं हुआ ।आखिर किसी तरह खींच खाँचकर…

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अधूरे ख़्वाब

अधूरे ख़्वाब की ताबीर हूँ मैं कहीं ख़यालों की तेरे तस्वीर हूँ मैं कहीं।। लम्हा-लम्हा तू साथ रहता मेरे। तेरे जीवन की जागीर हूँ मैं कहीं।। हो मुक़म्मल मेरी भी हस्ती कभी। रंग लाती मुहब्बत की तासीर हूँ मैं कहीं।। जर्रे-जर्रे में तेरा अक्स दिखता मुझे। रहगुज़र की तेरे तक़दीर हूँ मैं कहीं।। चलती रहती…

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आज विश्व में आई विपदा चारों ओर है त्राहिमाम

आज विश्व में आई विपदा चारों ओर है त्राहिमामचीनी भाई ने दिया कोरोना जिसने मुसीबत में डाली है जान आज युद्ध की घड़ी है आयी पर तैयार खड़ा है हिंदुस्तानबहनों – भाईयों न घबड़ाओ होशो-हवाश से लो सब काम माना वैरी है बड़ा बलशाली पर हम भी हैं बुद्धिमानदें सफाई पर ध्यान हम खुद के,…

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आज की आवाज

शोषित पीड़ित की ढाल था जो, अब समुदायों की ढाल बना। अल्पसंख्यक का हार बना, यह देश के हित जंजाल बना।। कानून को ढाल बनाकर के, तुम अपने निज़ हित साध रहे। स्वारथ में इतने डूब गए, कर देश को तुम बर्बाद रहे।। याद करो कुछ पिछली भी, हम क्या सह कर के आए हैं।…

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