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भारत में उतर आए भगवान

भारत में उतर आए भगवान मगर नहीं समझा इंसान सफेद सफेद कपड़ों को पहने ऊपर नीली पहनी पोशाक क्यों मुंह पर लगाया मास्क अरे इतना तो तू जान। जमीं पर उतर आए भगवान। सारे रोगों से तुझे बचाएं लगा दांव पर अपनी जान जमीं पर उतर आए भगवान। पूजा इनकी कर ले ह्रदय में रख…

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ऐसा मेरा भारत है

गीत- ऐसा मेरा भारत है अवतारों की जन्‍मभूमि है, वेदभूमि की ताकत है, कण-कण में ईश्‍वर बसते हैं हर जीवन शरणागत है मातृभूमि है, कर्मभूमि है, ऐसा मेरा भारत है। सप्‍त पुरी हैं चारधाम हैं, भिन्‍न-भि‍न्‍न संस्‍कृतियाँ हैं महाभारत रामायण वेद- पुराणों जैसी निधियाँ हैं, सर्वधर्म समभाव सहेजे, ऐसा मेरा भारत है ।  मस्‍तक है…

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सवाल किससे करें?

ज़हन में कई हैं ख्याल, सवाल किससे करें? सियासत का बुरा हाल, सवाल किससे करें? करते हैं नंगा नाच, संसद में अब नेता, अपनी ही ठोंके ताल, सवाल किससे करें? सब चाहते बिरयानी, चाँदी के थाल में, ना खाएं चावल दाल, सवाल किससे करें? लूट, हत्या व डकैती, राहजनी बेख़ौफ़, सड़क पर ताण्डव कमाल, सवाल…

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गर्मी पर दोहे : दुष्यंत कुमार

बढ़ रही है गर्मी, द्वार खड़ी है मौत। न जागे गर नींद से, मनाओगे रोज शोक।।१।। काट जंगल वनों को, बन गए खुद यमराज। फँसोगे अपने जाल में, वरना आ जाओ बाज।।२।। नौतपा में दिखी गर्मी, याद आ गयी नानी। पता चला इस दौर में, कितना उपयोगी पानी।।३।। जीव जन्तु भी मर रहे, खुद सराबोर…

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समस्याएँ –लाँकडाउन में मजदूरों की।

अभी कुछदिनों पूर्व तक प्रथम लॉकडाउन के दौरान देश में अचानक बढ़ती कोरोना संक्रमण की संख्या के लिए देशवासियों , नेताओं ,पत्रकारों  मीडिया और अन्य उन सभीसामान्य लोगों के द्वारा जो  लॉक डाउन के पश्चात देश को कोरोना मुक्त होजाने का स्वप्न देख रहेथे,उन तबलीगी जमातियों को अत्यधिक कड़वाहट से भर कर दोषी ठहराने लगेथे…

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अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का शक्तिशाली माध्यम है ‘कला’

( विश्व कला दिवस पर विशेष) कला हमेशा से ही अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का एक शक्तिशाली माध्यम रहा है।दुनियाभर में आज यानी 15 अप्रैल को वर्ल्ड आर्ट डे (विश्व कला दिवस) मनाया जा रहा है। कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को हर साल 15 अप्रैल को मनाया जाता…

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फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ: नौकरशाही, सत्ता और संवेदनहीनता

जब शासन सेवा से अधिक अहंकार बन जाए — फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ, सत्ता का चेहरा संवेदना का शून्य बनकर, लोकतंत्र को मशीन बना देता है जहाँ नियम ज़्यादा हैं और रिश्ते कम। – डॉ. सत्यवान सौरभ हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं है कि समाज अन्याय से भर गया है, बल्कि…

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सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

आप सभी को भारतीय संस्कृति के महान पर्व पंच दिवसीय महोत्सव की बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं। धन तेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा के साथ भाई-बहन के पवित्र पर्व भाई-दूज, ये सब पंच दिवसीय महोत्सव के अंग हैं।गोवर्धन पूजा एवं भाईदूज नवम्बर में (2-3) मनाएंगे। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में लोग अपने…

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कविता– “कोरोना”

हिन्दू है न ये मुसलमान कोरोना, रक्तबीज राक्षस विषाणु कोरोना। जो ग्रास बने हैं उन्हें उपचार चाहिए, सबका इस व्याधि से बचाव चाहिये। साबुन से हाथ धुलें मास्क लगाएं, छींकें मुह ढ़क सामाजिक दूरी बनाये। संक्रमण बचाना ही अचूक है इलाज, जन जागरण से ही बचेगा ये समाज। न हो सामूहिक पूजा न समूह में…

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दिव्य दृष्टि के दीप जलाएँ

कविता मल्होत्रा बाल दिवस और दीपोत्सव, एक ही दिन आने वाले, आत्मा को आनँदित करते दोनों उत्सव, भारत के प्रत्येक नागरिक को, दोहरी भूमिका निभाने के लिए, सत्यम शिवम् सुँदरम की भावना के प्रति फिर एक बार आगाह कर रहे हैं। हमारे देश के मौजूदा हालातों, और बाज़ारू चकाचौंध के प्रति आकर्षित होता, मासूम बच्चों…

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