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सावन को आने दो

कुछ तो ख़ता ज़रूर हुई होगी जमाने से वर्ना सावन क्यूँ आनाकानी करता आने से ✍️ हम सभी ने अपने स्कूलों के बंधे बंधाए सिलेबस में ये तो ज़रूर पढ़ा होगा कि धरती का कितना सारा हिस्सा पानी से घिरा हुआ है।सागर का पानी भाप बनकर बादल का रूप धारण कर लेता है और बरसात…

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गोल्डन बुक ऑफ रिकार्ड द्वारा अनुमोदित कार्यक्रम में शिखा पोरवाल वैनकुंवर कनाड़ा से भाग लेंगी

आयोजक डॉ राजीव पाण्डेय कवि जी ने बताया कि“भारत रत्न काव्य महोत्सव”हिंदी साहित्य का अकल्पनीय ऑनलाइन आयोजन किया हैं।देश विदेश के 300 रचनाकारों की वाणी से गुंजायमान होगी भारत रत्न प्राप्त महापुरुषों की गाथा।21 नवम्बर 2021 प्रातः 10 बजे से रात 10 बजे तक।अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन के फेसबुक पेज पर लाइव रहेगा। सभी विद्वजनों का…

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“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय”

“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय” प्रश्न पूछने के अवसर भी आएँगे, अभी राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय है। राष्ट्र सर्वोपरि। हाल की पहलगाम घटना में एक हिंदू पर्यटक को आतंकवादियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि भारत की…

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गायों की हो रही है दुर्दशा

भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ। गायों की दुर्दशा को लेकर अब सिर्फ जिनके घर गाय है वो ही चिंतित हैं।  क्या गाय बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ पशुपालन विभाग की ही बनती है, बाकी समाज केवल तमाशा देखे। आज…

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कालचक्र : कुछ सच, कुछ कल्पना

कवि और कविता का सम्बन्ध अन्योन्याश्रित ही माना जाता रहा है। यह किसी विद्वत्जन का कथन तो नहीं पर आज कवि वही है जो कविताओं की रचना करता है तथाकविता भी वही जोअपने रचयिता को कवि की संज्ञा दे सकती है। दोनों एक दूसरे के आधार हैं।आज का कवि अपनी रचनाओं में अपने अन्तर की…

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सिसकती भारत माँ

तकनीकी व विज्ञानं अग्रसर करते भारत को नव वर्ष २०२३ की शुभ कामनायें (गंगा मैया के मेलेपन का निवारण करते शहीद का जो असमय ही छोड़ गया) सिसकती होगी भIरत माँ भी अपने शहीद ऐकला चलो भारतीय अन्वेषक पर जिसने अपना सारा जीवन त्याग दिया निस्वार्थ रूप तपस्वी बन उसकी सेवा कर खायी थी कसम…

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दुर्घटना पीड़ितों के लिए “कैशलेस” उपचार : नीयत नेक, व्यवस्था बेकार

इस देश में जब कोई सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो सबसे पहले यह नहीं पूछा जाता कि ज़ख्म कितना गहरा है — पहले यह पूछा जाता है कि “पहचान पत्र है?”, “बीमा है?”, “अस्पताल पंजीकृत है?” और फिर अंत में — “बचा पाएँगे या नहीं?”। मानो पीड़ित की जान से पहले कागज़ ज़रूरी हो।…

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ग़ज़ल : डा. अफ़रोज़ आलम-कुवैत

ग़मों ने घेर लिया जब मुझे ख़ुशी की तरहतुम्हारी याद का साया था ज़िन्दगी की तरह तेरे ख़्याल की वादी में गुम हुआ जो कभीये आंख बहने लगी मनचली नदी की तरह है एहतियात में डूबा हर एक हर्फ़ उसकावो ख़त भी लिखता है मुझको तो शायरी की तरह गिला मैं कैसे करूं उसकी बेवफ़ाई…

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