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काल और उसके रहस्य : आशा सहाय

जब कब अब और तब जैसे शब्द निरर्थक हैं अगर इनके साथ काल नहीं जुड़ा हो।पूर्वोक्त शब्दों से हम काल को मापने का दम्भ भरते हैं। वस्तुतः भौतिक दृष्टि से इसे मापना अत्यंत कठिन है। यह अपनी व्यावहारिक सुविधा के लिए करना चाहते हैं ताकि दो घटनाओं के मध्य की स्थिति को हम मस्तिष्क मे…

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दर्द ए आरक्षण (सुनील शर्मा)

लोकतंत्र में राजतंत्र का ही पलड़ा भारी है!कोई भी हो सत्ताधारी वोटों का व्यापारी है!!रोजगार के चक्कर में सड़कों पर युवा भटकते हैं!जब भी हक की बात करो आंखों के बीच खटकते हैं!!पढ़ लिख कर जो ख्वाब थे देखें सारे चकनाचूर हुए!कुछ आरक्षण की चक्की में पीसने को मजबूर हुए!!राजतंत्र के आगे देखो लोकतंत्र ही…

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दीपावली

            ” माँ आज भी ज्यादा दीये नही बिके ।”ठेले को किनारे लगाते हुए अशोक उदास होकर बोला ।     माँ ने उसे सांत्वना देते हुए कहा,” अरे कल बिक जायेंगे,क्यों परेशान हो रहा है ? देख मेरे भी दीये ज्यादा नहीं बिके हैं।”माँ बेटे को समझा तो रही थी पर मन ही मन बुरे…

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संपादक मनमोहन शर्मा ‘शरण
को मिला ‘संपादक रत्न सम्मान’

साहित्य जगत में अपनी अनुपम अनूठी एवं गौरवमयी उपस्थिति दर्ज कराता विश्व विख्यात संस्थान ‘साहित्य मण्डल श्रीनाथद्वारा’ द्वारा 3 दिवसीय आयोजन ‘हिंदी लाओ देश बचाओ’ में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे साहित्य प्रेमियों, पत्रकार–संपादक, समाजसेवियों का मिलन हुआ जिसमें उत्कृष्ट साहित्य सृजन हेतु साहित्यकारों को तथा संपादन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर संपादक…

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Valimai Box Office: अजीत-हुमा कुरैशी की फिल्म ने पहले दिन रचा इतिहास, सबसे बड़ी ओपनिंग का रिकॉर्ड

24 फरवरी को सिनेमाघरों में पहुंची तमिल फिल्म वलिमै ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त ओपनिंग का रिकॉर्ड बनाया है। अगर ट्रेड एक्सपर्ट्स की मानें तो फिल्म ने तमिलनाडु में अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग ली है। ओपनिंग डे की रेस में अजीत ने विजय और रजनीकांत जैसे सितारों को भी पीछे छोड़ दिया है।…

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राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की पुण्यतिथि

विधा:-दोहा छंद पोरबॅंदर गुजरात में, करमचंद के पूत। राजनीति के चाॅंद थे, भारतवर्ष सपूत॥ मोहनदास जहान में, दो अक्टूबर जन्म। अठारह सौ उनत्रवाॅं, सन था हिन्दू धर्म॥ सत्य अहिंसा पूजते, जपें राम का नाम। आजादी में भूमिका, सत्याग्रह संग्राम॥ भारत में पदवी मिली, राष्ट्रपिता सरनाम। “लक्ष्य”महात्मा का मिला,जीवन में उपनाम॥ जीवन जीया सादगी, रहा मृदुल…

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प्रकृति का रंग

Dr Rajni Yadav         प्रकृति का ये रंग लाजवाब था  इंसान घरो में कैद और बेजुबान आज़ाद था हवाएँ यू महकने लगी  कोयले पेड़ो पर चहकने लगी नदिया इतनी साफ थी  जमीन को आसमान से मिलने की आस थी जो डर अब तक मुर्गियों,मछलियों और बेजुबानो कीआंख में था उसकी झलक इंसानो में साफ़ थी यू…

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सात फेरे

सात फेरे (नमस्कार प्रिय पाठकों (मित्रों) मेरे द्वारा लिखी यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक हैं । किसी भी व्यक्ति का नाम या कहानी का कोई क़िस्सा सयोंग ही होगा। कहानी के शीर्षक के आधार पर जो सात वचन मैंने लिए हैं वो वास्तविक हैं । कहानी का उद्देश्य समाज में महिलाओं की स्थिति को दर्शाना…

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मोबाइल की चमक मृगतृष्णा है —-राजेन्द्र परदेसी

शहर का युवा आज सबसे ज्यादा व्यस्त दिखता है और सबसे ज्यादा खाली भी वही है। उसके हाथ में हमेशा मोबाइल है। उसकी आँखें हमेशा स्क्रीन पर हैं। उसे हर पाँच मिनट में देखना है कि उसकी पोस्ट पर कितने लाइक आए, कितने कमेंट आए, किसने क्या कहा। यही बेचैनी आज शहर के युवा की…

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काफल (एक सत्य कथा )

(ये बात एक सच्ची घटना पर आधरित एक सच्चा लेख है़ ! जिसको की मैने जब सुना तो इस घटना को लिखे बिना नहीं रह पाया ! वेसे तो यहाँ कई घटनाए कहानियो का रूप ले चुकी है़ ! मानकों द्वारा ये भी नहीं की कभी इस घटना को मुद्रित नहीं किया गया होगा !…

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