–डॉ. कृष्ण शाह यात्री
(नेपाल)
वह फूलवारी एक नमूने के रूप में बसाई गई थी। वहाँ हर तरह के फूलों ने शोभा बढ़ा रखी थी। उस फूलवारी की ख्याति, सुगंध और सुंदरता सारी दुनिया में फैली हुई थी।
उस फूलवारी में कुछ निर्मम काँटे भी थे। वे काँटे हमेशा फूलों को हानि पहुँचाने की कोशिश करते थे। इसलिए फूल काँटों से बचते हुए अपनी कलियों को पालते थे।
फूल काँटों के साथ जीने के लिए अभिशप्त थे। फूलवारी का अपना नियम था – सह-अस्तित्व का।
एक दिन फूलों ने देखा – कुछ कलियाँ बिना खिले ही मर रही हैं। कई कलियों की तो बस धड़कन ही बाकी थी। फूल काँटों से आक्रोशित थे।
तब फूलों ने निर्णय लिया – अपराधी काँटों को अपनी ही डाल से काटकर फेंक देने का।
हाल : बोस्टन, अमेरिका
