क्या बताऊँ जो दिल के अंदर है,
सिर्फ़ नाकामियों का लश्कर है ۔
लूटने पर वही है आमादा,
जिसको समझा गया कि रहबर है.
वाह वाही बटोर ली जिसने,
लोग कहते हैं वो सुख़नवर है
तू कहाँ मेरे ग़म से वाक़िफ़ है,
मेरा ग़म ही मेरा मुक़द्दर है۔
राहे हक का सफर तो मुश्किल है
नूरे हक से ये दिल मुनव्वर है
अपनी क़िस्मत पे नाज़ है मुझको
इश्क़ किसको यहां मयस्सर है
“आरज़ू” क्यों न हो तेरी मुझको
सारी दुनिया में तू ही बेहतर है
आरज़ू महक
हैदराबाद
