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फिल्म 695 में दिखेगा उभरते सितारे आलाप के अभिनय  का जलवा

पूरा देश राममय लग रहा है जी हाँ दोस्तों आप सभी जानते हैं कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 22 जनवरी 2024 को हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के नामचीन लोग इस प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होंगे। संत,…

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हमारा प्यारा हिन्दुस्तान

#bharat #hindustan #hindikavita #umakantbhardwaj जीवन पथ को सुगम बनाओ, वक्त गुजरता जाने दो।  मेहनत करो रात दिन मन से,तुम अभाव भर जाने दो॥  व्यस्त रखो स्वयं को तुम,वांछित अर्जित कर पाओगे।  गुजरा कब दुर्दिन वक्त,चाहकर भी नहीं जान पाओगे॥  आदर्श करो प्रस्तुत नव पीढ़ी,मार्ग यही अपनाने दो।  जीवन पथ को सुगम बनाओ,वक्त गुजरता जाने दो॥ …

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गंतव्य संस्थान के मुख्यालय पर प्रमुख समाजसेवी श्री सतीश बाजवा जी व डॉ कांता बाजवा जी का हुआ भव्य स्वागत

आज 5 जनवरी 2024, गंतव्य संस्थान के मुख्यालय पर प्रमुख समाजसेवी श्री सतीश बाजवा जी व डॉ कांता बाजवा जी पधारे संस्थान के अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार त्यागी व रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी धीरपुर के कोषाध्यक्ष श्री विजय कुमार शर्मा जी ने पटका पहना कर स्वागत किया इस अवसर पर भारतीय प्रकृतिक चिकित्सक संघ के महासचिव…

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२१वीं सदी में विश्व में हिंदी भाषा की स्वीकृति

#hindi #hindibhasha 21वीं सदी में हिंदी भाषा का महत्व और स्वीकृति विश्वभर में बढ़ रहा है। यह भाषा न केवल भारतीय उपमहाद्वीप में, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही है। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे 21वीं सदी में हिंदी भाषा को विश्वस्तरीय स्तर पर स्वीकृति मिल रही है। हिंदी भाषा…

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जीवन का सार

गृहस्थी का दायित्व, कब अवसान देता है, गाड़ी-सा जीवन जिम्मेदारियों की सड़क पर, सरपट दौड़ता है, अहर्निश अविराम। स्व मनोरथ श्रम-भट्ठी में झोंकता है, स्वजनों के काम्यदान के लिए। तब प्रमोद-सरिता अविरल बहती है, परिजनों को भिगोती है अपने सुखदायी मेघपुष्प से। कर्तव्यों की वृत्ति अंततः जीर्ण बना देती है, पराश्रित बना देती है। बस…

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हिंदी वर्ण प्रकृति के संग

अमलतास खिला सुवर्ण सा आम बौर भर आये इमली की खटास ईख मिठास मन लुभाये उड़े परिंदे लहरा पंख ऊँचाई नील गगन छू आये ऋतु वसंत जीवन में उर्जा भर लाये | एकाग्रता से विद्याध्ययन एश्वर्यता राष्ट्र समृद्ध बनाये ओजस्वी मन सुसंस्कृति और सुज्ञान बढ़ाये अंशुमान क्षितिज पर अ: अवनि जगमगाये | कुमुदनी कनेर कंद…

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नए साल की नई सुबह : राजनीतिक सफरनामान

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव नए कैलेण्डर के नए वर्ष के सुनहरे पन्ने पर दर्ज नए साल के भावो को अंगीकार कर सूरज की शीतल रष्मियों से आल्हादित आंगन की भोर में नया भले ही कुछ भी न हो पर मन में नएपन का उत्साह अवश्य होता है । चिड़ियों की सहक तो पुरानी ही है पर…

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साईकिल

           इलाहाबाद का नैनी इलाका कभी बंजर जमीन था जहां उपज के नाम पर कुछ भी नहीं था लोग  सब्जी तथा फूलों का व्यवसाय करके अपना घर चलाते थे।उन‌ खाली जमीनों पर करीब सत्तर के दशक में कुछ पूंजीपतियों की नजर पड़ी और उन्होंने उसे खरीदकर उनपर अपनी-अपनी फैक्ट्रियां बनानी चालू कर दीं। इससे दो फायदा…

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सभ्य असभ्य इसी धरती पर।

डॉक्टर चंद्रसेन भारती सभ्य असभ्य इसी धरती पर। देव धनुज रहते आऐ। रावण से सब घृना करते  राम नाम सुन हर्साऐ। धरती से ही सोना उपजे, कोयला खान नजर आए। मंथन से कोलाहल निकला, अमृत वही नजर आए। संस्कार मिलते हे घर से, गली गलियारे मिलें नहीं। कागा धन ना हरे किसी का, कोयल किसको…

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सत्य की खोज : आशा सहाय

दिनांक– बारह दिसम्बर दो हजार तेइस।–नवभारत टाइम्स मे 'द स्पीकिंग ट्री' के अन्तर्गत श्री जे. कृष्णमूर्ति के कुछ विचार पढ़े जिन्होंने मुझे सोचने को प्रेरित करते हुए बहुत हद तक सहमत होने पर विवश किया। उनके विचार सत्य की खोज पर आधारित थे । उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सत्य की खोज…

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